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असमंजस -होली कब जलाई जाए, चन्द्रग्रहण के साथ शुभ मूर्हूत को दुविधा में लोग

बिल्सी-बदांयू 28 जनवरी।

इस बार होलिका दहन पर लोग असमंजस में हैं। इस वर्ष के पहले चंद्रग्रहण की वजह से लोग भ्रमित हैं कि किस दिन और समय होलिका दहन करना उचित होगा। हालांकि रंग खेलनी होली तो चार मार्च को ही खेली जाएगी। ज्योतिषाचार्यों से भी लोग होलिका दहन का शुभ मुहूर्त पूछने पहुंच रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य राजेश शर्मा ने बताया कि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा तिथि, होलिका दहन के लिए सबसे उत्तम मानी जाती है। यदि भद्रा रहित, प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा का अअभाव हो परंतु भद्रा मध्य रात्रि से पहले ही समाप्त हो जाए तो प्रदोष के पश्चात जब भद्रा समाप्त हो तब होलिका दहन करना उचित रहता है। यदि भद्रा मध्य रात्रि तक व्याप्त हो तो ऐसी परिस्थिति में भद्रा पूंछ के दौरान होलिका दहन किया जा सकता है। लेकिन भद्रा मुख में होलिका दहन नहीं करना चाहिए।

काशी पंचांग के अनुसार, दो मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 05:18 बजे से शुरू होकर तीन मार्च को शाम 04:33 बजे तक रहेगी। भद्रा दो मार्च से सांयकाल 05:18 से प्रात: 4:56 बजे तक रहेगी। होलिका का दहन दो मार्च को भद्रा पुच्छ में रात 12:50 बजे से 02:02 बजे तक अथवा भद्रा समाप्त होने के बाद सुबह 4:56 बजे के बाद भद्रारहित काल में भी होलिका दहन कर सकते हैं। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार, यह तिथि तीन मार्च में प्रवेश कर जाएगी।
रंग भरी होली चार मार्च को खेली जाएगी।

नववर्ष का पहला चंद्र ग्रहण तीन मार्च को पड़ रहा है। यह एक ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण होगा जो भारत के कुछ हिस्सों में दिखेगा। ग्रहण दोपहर 3:21 बजे से शाम 6:46 बजे तक रहेगा। तीन मार्च को सूतक सुबह 09:20 बजे से शाम 06:46 बजे तक नौ घंटे का रहेगा। वैदिक द्रिक पंचांग के अनुसार, पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ दो मार्च शाम 05:55 बजे होगा और तीन मार्च शाम 05:07 बजे पूर्णिमा तिथि का समापन होगा। होलिका दहन तीन मार्च मंगलवार को प्रदोष के दौरान शाम 06:46 बजे से रात 08:36 बजे तक कर सकते हैं। रंगभरी होली चार मार्च को ही खेली जाएगी।

अमन वार्ष्णेय

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