




डॉ. संजीव गुप्ता की चेतावनी – बच्चों को पटाखों से 7-8 मीटर दूर रखें, तेज धमाकेदार पटाखों से रहें दूर।
उझानी बदायूं 7 नवंबर।
दिवाली खुशियों और रोशनी का त्योहार है, लेकिन आतिशबाजी के दौरान जरा सी लापरवाही गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। पटाखों की तेज आवाज कानों की सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकती है, वहीं बारूद और रसायनों से निकलने वाला धुआं सांस और आंखों से जुड़ी समस्याएं बढ़ा सकता है।
इसको लेकर डॉ. संजीव गुप्ता ने लोगों को तेज धमाकेदार पटाखों से परहेज करने और बच्चों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी है।
दिवाली पर अक्सर एक-दूसरे से तेज धमाका करने की होड़ में लोग तेज आवाज वाले पटाखे चलाते हैं। अचानक कान के पास तेज धमाका होने से असहनीय पीड़ा हो सकती है और कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है।
डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया -पटाखों की तेज आवाज कानों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। कान के पास अचानक तेज धमाका होने से दर्द और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा रहता है। तेज आवाज के संपर्क में आने से कानों में झनझनाहट और कुछ समय के लिए सुनाई देना बंद होने जैसी परेशानी भी हो सकती है। इसलिए आतिशबाजी करते समय दूरी बनाए रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।
डॉ. संजीव गुप्ता ने बताया कि धुएं वाले पटाखों से निकलने वाले SPM, कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाईऑक्साइड जैसे प्रदूषक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं। इनकी वजह से दमा, सांस की नली में सूजन, नजला, साइनोसाइटिस और लेरिंजाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। ऐसे में सांस संबंधी बीमारी से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
उन्होंने बताया -पटाखे जलाते समय छोटे बच्चों को कम से कम 7 से 8 मीटर की दूरी पर रखना चाहिए। पटाखों के बारूद और धुएं के संपर्क में आने से बच्चों की त्वचा पर दाने निकल सकते हैं। उनकी आंखों में जलन की शिकायत भी हो सकती है।
बच्चों को पटाखे जलाने की जगह से दूर रखें और उन्हें अकेले आतिशबाजी न करने दें। पटाखों के धुएं से बचाव के साथ आंखों और त्वचा की सुरक्षा का भी ध्यान रखना जरूरी है।
ध्वनि की तीव्रता संभावित असर
35 डेसीबल कष्टदायक हो सकती है
40 से 50 डेसीबल दर्द और कानों में झनझनाहट
100 डेसीबल से ज्यादा सुनने की क्षमता पर गंभीर असर
पटाखों की तेज आवाज से कानों को होने वाले नुकसान को लेकर डॉक्टरों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। ध्वनि की तीव्रता बढ़ने के साथ कानों में दर्द, झनझनाहट और सुनने की क्षमता प्रभावित होने का खतरा भी बढ़ सकता है।
डॉक्टरों ने लोगों से अपील की है कि त्योहार पर तेज धमाकेदार पटाखों से बचें। पटाखे जलाते समय बच्चों को सुरक्षित दूरी पर रखें और धुएं के सीधे संपर्क में आने से बचें। आंखों, त्वचा और कानों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए आतिशबाजी करें, ताकि त्योहार की खुशियां किसी हादसे या स्वास्थ्य समस्या में न बदलें।
सुरक्षित दिवाली – खुशियों वाली दिवाली, बीडीएन इंडिया।
–
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com