8:13 am Wednesday , 28 October 2026
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जय श्रीकृष्णा जय श्री हरि – Jaya kishori

Jaya kishori

जय श्रीकृष्णा जय श्री हरि
कार्तिक मास पंचाग 2026
आरंभ – 27 अक्टूबर 2026, वार- मंगलवार
कार्तिक मास, कृष्ण पक्ष, प्रतिपदा तिथि ।
समापन – 24 नवंबर 2026, वार-मंगलवार
कार्तिक मास, शुक्ल पक्ष, पूर्णिमा तिथि ।

आप सभी को कार्तिक मास की हार्दिक शुभकामनाएं।

कार्तिक मास की महिमा

न कार्तिकसमो मासो न कृतेन सामं युंग।
न वेदं सदृशं शास्त्रं, न तीर्थ गंगाय समं ।।

कार्तिक मास के समान कोई दूसरा मास नहीं, सतयुग के समान कोई दूसरा युग नहीं। वेद के समान कोई शास्त्र नहीं और गंगा के समान कोई तीर्थ नहीं।

कार्तिक मास कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा से प्रारंभ होता है और कार्तिक पूर्णिमा पर समाप्त होता है। कार्तिक मास में करवा चौथ, धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा, भैया दूज, छठ पूजा, गोपाष्टमी, आँवला नवमी, देवउठनी/प्रबोधिनी एकादशी (तुलसी विवाह), कार्तिक पूर्णिमा (देव-दिपावली) जैसे बड़े पर्व मनाए जाते हैं।

कार्तिक मास में स्नान, पूजा, अर्चना, तुलसी सेवा, दीपदान और भगवान श्री राम, श्री हरि विष्णु और श्रीकृष्ण (दामोदर रूप), कार्तिक भगवान, शिवजी और माता लक्ष्मी की उपासना करने का विधान है इससे अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है तथा जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।

कार्तिक मास में व्रत, त्योहार, दान, स्नान और भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस माह आने वाली देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी का विशेष महत्व है, मान्यता है कि इसी दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और चातुर्मास समाप्त होता है इसके बाद से ही सभी मांगलिक कार्य शुरू किए जाते हैं। कार्तिक मास में देव आराधना के साथ धन-संपत्ति, व्यापार-कारोबार में वृद्धि के लिए पूजा-अर्चना कर कामना करते हैं।

प्रातः स्नान: कार्तिक मास में ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदियों (जैसे गंगा) में स्नान करने से अक्षय पुण्य और मोक्ष की प्राप्ति होती है। अगर नदी नहाना संभव न हो तो अपने घर पर स्नान करते समय बाल्टी में गंगाजल डालकर गंगा सहित सभी पवित्र नदियों का मानसिक स्मरण करते हुए श्रद्धापूर्वक स्नान करना शुभ माना जाता है। प्रातः स्नान के पश्चात सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करें।

दीपदानः धर्म शास्त्रों के अनुसार कार्तिक मास में प्रतिदिन दीपदान करने की परंपरा है, विशेष रूप से सूर्यास्त के बाद दीप जलाने से मन शुद्ध व वातावरण पवित्र होता है और घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। कार्तिक मास में तुलसी के पौधे, पीपल-आंवला-बेल वृक्ष-वट वृक्ष के नीचे, नदी, पोखर, तालाब, मंदिर, अपने घर के मुख्य द्वार व छत की मुंडेर, चौराहों आदि पर दीपदान किया जाता है, इससे पुण्य की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास की परंपरा के अनुसार दीपदान करने से से भय, अंधकार और पापों व यम यातना से मुक्ति मिलती है। कार्तिक मास में एक दीप दान करने का फल सौ यज्ञ करने के समान माना जाता है। यह अनंत पुण्य दिलाता है। जलाशय के किनारे दीया प्रवाहित करने से पिछले 100 जन्मों के पाप नष्ट होते हैं। दीपदान करने से हमारे पितरों को शांति एवं मोक्ष की प्राप्ति होती है, उनके आशीर्वाद से घर-परिवार में सुख-शांति रहती है।

तुलसी सेवा और विवाहः अपने घर पर तुलसी का पौधा लगाएं और दान करें। तुलसी माता को जल चढ़ाएँ, उसके समीप घी का दीपक जलाएँ, तुलसी स्तुति/स्त्रोत का पाठ करें, तुलसीजी की श्रद्धापूर्वक परिक्रमा करें। तुलसी को भगवान विष्णु (शालिग्राम) की प्रिय माना गया है अतः इस महीने की कार्तिक शुक्ल एकादशी को तुलसी-शालीग्राम का विवाह का विशेष विधान है।

धार्मिक तीर्थ व देव दर्शन- कार्तिक मास में प्रमुख धार्मिक मन्दिर व तीर्थ स्थलों पर देव दर्शन का विशेष महत्व है। कार्तिक मास के तीन प्रमुख तीर्थ स्थलों का अति विशेष महत्व हैं जिनके नाम क्रमश: पुष्कर-राजस्थान, मथुरा-उत्तरप्रदेश, पञ्चगङ्गा-वाराणसी (उत्तरप्रदेश का एक क्षेत्र) है। इस वर्ष कार्तिक के इस पुण्य मास में किसी भी धार्मिक तीर्थ-स्थल की यात्रा अवश्य करें तथा वहाँ स्नान, दान, जप, तप, तीर्थ के प्रमुख देव के दर्शन, रात्रि विश्राम करे।

पुष्कर तीर्थ-कार्तिक मास में पुष्कर तीर्थ का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस दौरान पुष्कर में 33 कोटि देवी-देवता, यक्ष, गंधर्व और किन्नर विराजमान रहते हैं। पुष्कर सरोवर में स्नान और ब्रह्म गायत्री-ब्रह्म सावित्री के दर्शन का करोड़ों गुना फल मिलता है।

मथुरा (उत्तर प्रदेश): कार्तिक मास को भगवान दामोदर (श्रीकृष्ण) का माह माना जाता है। इस दौरान मथुरा और बृज क्षेत्र में स्नान, परिक्रमा और पूजन का अत्यधिक पुण्य होता है

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