8:33 am Tuesday , 20 October 2026
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जवारे, दुर्गा माॅ प्रतिमा विसर्जन कब करें- Jaya Kishori

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Jaya Kishori

जवारे,दुर्गा माॅ प्रतिमा विसर्जन कब करें, कौन-सा मंत्र बोलें? व्रत का पारण कब है जानें विधि, शुभ मुहूर्त और सही तारीख और दशहरा के दिन करें ये ज्योतिषीय उपाय, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

कल 20 अक्टूबर 2026 को जीत का प्रतीक ‘विजयादशमी’ का पर्व मनाया जायेगा पुराणों के अनुसार रावण पर भगवान श्री राम की जीत के उपलक्ष्य में विजयदशमी का ये त्योहार मनाया जाता है विजयदशमी के दिन अपराजिता की पूजा करने का भी विधान है इसके अलावा इस दिन शमी की पूजा का भी विधान है शमी की पूजा करने से गक ताम में सफलता मिलती है और घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है. विजयादशमी को दशहरा के नाम से भी जाना जाता है इस दिन इन विशेष उपायों को करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है.पं.संजय शास्त्री अनुसार दशहरा के दिन किए जाने वाले खास उपाय के बारे में वहीं हिंदू धर्म में दशहरा के दिन नीलकंठ पक्षी का दिखना भी शुभ संकेत माना गया है.

हर साल आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है इस दौरान जवारे भी बोए जाते हैं नवरात्रि के समापन के बाद इन जवारों को देवी प्रतिमा के साथ ही विसर्जित कर दिया जाता है.
शारदीय नवरात्रि में पहले दिन मां दुर्गा की पूजा के साथ जवारे बोने की भी परंपरा है नवरात्रि के पहले दिन मिट्टी के पात्र में जौ बोए जाते हैं और नौ दिनों तक इनकी देखभाल की जाती है मान्यता है कि जौ की हरियाली सुख-समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक है नवरात्रि पूरी होने के बाद मां दुर्गा की प्रतिमा, कलश और जवारों का विसर्जन किया जाता है.
आगे जानिए दुर्गा प्रतिमा और जवारों का विसर्जन किस दिन करें, इसकी विधि क्या है और इस दौरान कौन-से मंत्र बोलने चाहिए

दुर्गा प्रतिमा और जवारे विसर्जन की तारीख 2026
शारदीय नवरात्रि के समापन पर दशमी तिथि में दुर्गा प्रतिमा और जवारों के विसर्जन की परंपरा है.
नवरात्रि का अंतिम दिन आज 19 अक्टूबर, सोमवार को है, जबकि कल 20 अक्टूबर, मंगलवार को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा ऐसे में 20 अक्टूबर को दुर्गा प्रतिमा, कलश और जवारों का विसर्जन किया जा सकता है पूजा और विसर्जन का समय तय करने के लिए स्थानीय पंचांग का ध्यान रखें.

विसर्जन 2026 शुभ मुहूर्त
सुबह 09:20 से 10:46 तक
सुबह 10:46 से दोपहर 12:11 तक
दोपहर 11:48 से 12:34 तक
दोपहर 12:11 से 01:37 तक
दोपहर 03:02 से शाम 04:28 तक

दुर्गा प्रतिमा और जवारों का विसर्जन कैसे करें
दशहरे के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। इसके बाद मां दुर्गा की पूजा करने का संकल्प लें देवी को कुमकुम का तिलक लगाएं.
देवी को फूलों की माला चढ़ाएं और शुद्ध घी का दीपक जलाएं पूजा के दौरान मां दुर्गा के सामने अपनी मनोकामना रखते हुए इन मंत्रों का जाप करें

मंत्र 1
रूपं देहि यशो देहि भाग्यं भगवति देहि मे।
पुत्रान् देहि धनं देहि सर्वान् कामांश्च देहि मे॥

मंत्र 2
महिषघ्नि महामाये चामुण्डे मुण्डमालिनी।
आयुरारोग्यमैश्वर्यं देहि देवि नमोस्तु ते॥

इसके बाद मां दुर्गा के साथ जवारों की भी पूजा करें देवी को फल, फूल और मिठाई अर्पित करें इसके बाद प्रतिमा और जवारों को विसर्जन स्थल तक ले जाएं.

विसर्जन से पहले बोलें ये मंत्र
विसर्जन करने से पहले हाथ में चावल और फूल लेकर मां दुर्गा का ध्यान करें उनसे अगले साल फिर आने और भक्तों पर कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करें इस दौरान यह मंत्र बोल सकते हैं

गच्छ गच्छ सुरश्रेष्ठे स्वस्थानं परमेश्वरि।
पूजाराधनकाले च पुनरागमनाय च॥
मंत्र बोलने के बाद परंपरा के अनुसार पहले मां दुर्गा की प्रतिमा, फिर कलश और अंत में जवारों का विसर्जन करें

नवरात्रि व्रत का पारण कब है 2026
नवरात्रि व्रत का पारण 19 और 20 अक्टूबर दोनों दिन है। अगर आप नवमी तिथि पर व्रत खोलते हैं तो आप 19 अक्टूबर की सुबह 10 बजकर 51 मिनट से लेकर 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 तक के बीच में कभी भी व्रत खोल सकते हैं। वहीं जो लोग दशमी तिथि पर ये व्रत खोलते हैं वे 20 अक्टूबर की दोपहर 12 बजकर 50 मिनट के बाद कभी भी इस व्रत को खोल सकते हैं
कुछ लोग नवरात्रि व्रत का पारण अष्टमी या नवमी पर कन्या पूजन के बाद करते हैं अगर आप भी ऐसे ही करते हैं तो 19 अक्टूबर को हवन और कन्या पूजन के बाद आप अपना व्रत खोल सकते हैं.

नवरात्रि व्रत पारण विधि
नवरात्रि व्रत के पारण से पहले माता दुर्गा की विधि विधान पूजा करें।

इसके बाद माता रानी का हवन करें।

फिर विधि विधान से कन्या पूजन करें।

इसके बाद माता रानी को चढ़ाए गए भोग हलवा, चना और पूरी को ग्रहण करके अपना व्रत खोल लें।

दशहरा के दिन करें ये ज्योतिषीय उपाय, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि और कार्यों में मिलेगी तरक्की

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