6:31 pm Friday , 16 October 2026
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स्टूडेंट्स सेमिनार श्रृंखला के दसवें दिन पादप उद्विकास तथा आवृतबीजी पौधों के आर्थिक महत्व पर हुई चर्चा

राजकीय महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा चलाए जा रहे 15 दिवसीय स्टूडेंट्स सेमिनार श्रृंखला के 10वें दिन बीएससी तृतीय सेमेस्टर की छात्राओं ने वनस्पति विज्ञान के महत्वपूर्ण विषयों पर पावरपॉइंट प्रस्तुतियाँ दीं तथा पादप उद्विकास तथा आवृतबीजी पौधों के आर्थिक महत्व को रोचक ढंग से समझाया गया।
छात्रा गौरी ने पादप उद्विकास के सिद्धांतों प्लेजियोमॉर्फी और एपोमॉर्फी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्लेजियोमॉर्फी जीवों का प्राचीन अथवा पूर्वजों से प्राप्त लक्षण है, जबकि एपोमॉर्फी विकास की प्रक्रिया में उत्पन्न नया और विशिष्ट लक्षण है, जो किसी वर्ग की पहचान निर्धारित करता है।
छात्रा वैष्णवी जोहरी ने आवृतबीजी पौधों के बड़े समूह एस्टेरेसी कुल के आर्थिक महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि इस कुल से सूरजमुखी का तेल, लैट्यूस जैसी खाद्य सामग्री, औषधीय पौधे तथा सजावटी पौधे प्राप्त होते हैं। एस्टेरेसी कुल में सूरजमुखी, लैट्यूस, आर्टिचोक और कई औषधीय एवं सजावटी पौधे शामिल हैं, जिनका खाद्य, तेल और बागवानी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान है।
दोनों छात्राओं की प्रस्तुतियों की उपस्थित शिक्षकों तथा छात्र-छात्राओं ने भरपूर सराहना की। सेमिनार का संचालन वनस्पति विज्ञान विभाग की प्रभारी डॉ. सरिता ने किया।

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