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महिला पत्रकार से मारपीट मामले में SC सख्त, कहा – गिरफ्तारी मत करो, CCTV सुरक्षित रखो, महिला जजों की कमेटी बनेगी

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नई दिल्ली 15 अक्टूबर ।

दिल्ली में 10 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकार से बदसलूकी और मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को दो बड़े निर्देश दिए हैं –

संबंधित महिला पत्रकार के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई (coercive action) न की जाए।
CCTV सुरक्षित रखो:प्रदर्शन से जुड़े सभी CCTV फुटेज, डिजिटल वीडियो, सोशल मीडिया रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं, ताकि बाद में सबूत के तौर पर इस्तेमाल हो सकें।

यह विवाद 3 अक्टूबर का है। स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने आरोप लगाया था कि जंतर-मंतर के पास बूटा सिंह गोलचक्कर पर वह एक एक्टिविस्ट की हिरासत का वीडियो बना रही थी, तभी ड्यूटी पर तैनात ACP विवेक भगत ने उन्हें गलत तरीके से छुआ और धक्का दिया।

रोजी ने इसकी शिकायत की लेकिन उनकी शिकायत पर FIR दर्ज नहीं हुई। उल्टा 13 अक्टूबर को ACP विवेक भगत ने संसद मार्ग थाने में रोजी समेत 6 लोगों (गजेंद्र सिंह, अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका, सौरव दास, रत्ना सिंह) के खिलाफ SC/ST (अत्याचार निवारण) एक्ट और BNS की धारा 221, 356(2) के तहत FIR दर्ज करा दी। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान जातिसूचक टिप्पणी, सरकारी काम में बाधा और मानहानि की गई।

वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने कोर्ट में कहा – “महिला पत्रकार के साथ बहुत बुरा बर्ताव हुआ।” उन्होंने कहा कि मामला संवेदनशील है और पुलिस खुद अपनी जांच नहीं कर सकती।

जयसिंह ने विशाखा गाइडलाइन के तहत एक स्वतंत्र जांच कमेटी बनाने की मांग की, जिसकी अध्यक्ष महिला हो और जिसमें सेवानिवृत्त महिला जज, सेवानिवृत्त महिला IPS अधिकारी और सामाजिक कार्यकर्ता हों।

CJI ने इस पर सहमति जताते हुए कहा – “हम प्रथम दृष्टया इस बात से सहमत हैं कि आपके मामले में कमेटी मुख्य रूप से या पूरी तरह से महिलाओं से बनी होनी चाहिए।”

कोर्ट ने जयसिंह को निर्देश दिया कि वह दो सीलबंद लिफाफों में जानकारी दें –
लिफाफा 1 में पीड़ित महिला पत्रकारों के नाम।लिफाफा 2 में जांच कमेटी के लिए प्रस्तावित नाम।

सरकार का पक्ष – कौन पत्रकार, कौन रील मेकर?

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज के दौर में पहचानना मुश्किल है कि कौन रील मेकर है और कौन पत्रकार, क्योंकि हर कोई माइक लेकर रील बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि पत्रकार द्वारा पेश किया गया वीडियो AI-जनरेटेड हो सकता है, लेकिन आश्वासन दिया – “अगर पत्रकार जांच में सहयोग करती है तो गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि पत्रकारों को अतिरिक्त सुरक्षा की जरूरत है, क्योंकि इसमें अभिव्यक्ति की आजादी और पेशे का अधिकार दोनों शामिल हैं, लेकिन यह भी तय करना होगा कि क्या माइक और मोबाइल वाला हर व्यक्ति पत्रकार है।

सिर्फ रोजी ही नहीं, Free Speech Collective की याचिका में बताया गया कि 10-11 अक्टूबर के दौरान Scroll, Newslaundry, Reuters, Business Standard, The Hindu, Indian Express, PTI, The Quint समेत 38 पत्रकारों को हिरासत में लिया गया, घसीटा गया और एक गर्भवती महिला पत्रकार को धक्का दिया गया, जो अस्पताल में भर्ती है।

कोर्ट ने सभी मामलों पर नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई में तय होगा कि स्वतंत्र महिला कमेटी का गठन होगा या नहीं।

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