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नई दिल्ली 15 अक्टूबर ।
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को रोकने के लिए लगाई गई पाबंदियों पर सुप्रीम कोर्ट में फंसी दिल्ली पुलिस ने आखिर बिना शर्त माफी मांग ली है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार और केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने गुरुवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच के सामने दो अलग-अलग हलफनामे दाखिल कर “अनकंडीशनल एंड अनक्वालिफाइड अपोलॉजी” मांगी है, साथ ही अपने खिलाफ जारी अवमानना नोटिस वापस लेने की अपील की है। ।
CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चुनावी अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। परमिशन नहीं मिलने के बाद भी खुफिया इनपुट था कि लोग जमा हो सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने 9 अक्टूबर को आदेश दिया था कि मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर “कम्पलीट प्रोहिबिशन” नहीं लगाया जाए।
10 अक्टूबर को पुलिस ने 57 मेट्रो स्टेशनों पर पाबंदी का प्रस्ताव रखा, जिसे बाद में घटाकर 45 स्टेशन (दिल्ली के 303 स्टेशनों का लगभग 15%) कर दिया गया। GTB नगर और विश्वविद्यालय जैसे स्टेशनों के गेट बंद किए गए। रायसीना हिल के 4 किमी के दायरे में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया और 15 जिलों में सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया।
एडवोकेट शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन बताते हुए अवमानना याचिका दायर की। 11 अक्टूबर को कोर्ट ने प्रथम दृष्टया अवमानना का मामला मानते हुए गृह सचिव, पुलिस कमिश्नर और DMRC चेयरपर्सन डी. थारा को नोटिस जारी किया।
हलफनामे में पुलिस ने क्या कहा?
पुलिस कमिश्नर ने माफी के साथ-साथ अपनी कार्रवाई का बचाव भी किया। -कार्रवाई जरूरी थी: 10.10.2026 को उठाए गए एहतियाती कदम खुफिया इनपुट और लगातार बदल रही जमीनी स्थिति के आकलन पर आधारित थे, जिसका उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था में किसी भी व्यवधान को रोकना था।”
CJP का पुराना रिकॉर्ड: हलफनामे में कहा गया कि जुलाई में CJP ने 1000 लोगों की अनुमति ली थी लेकिन 20 जुलाई को 30,000 से ज्यादा लोग जुट गए, जिससे हिंसा, तोड़फोड़ हुई और 240-250 पुलिसकर्मी घायल हुए थे।
पाबंदियां आनुपातिक थीं: रात 10 बजे तक मेट्रो पूरी तरह बहाल कर दी गई थी। इंटरनेट सिर्फ सेलुलर डेटा का बंद किया गया था, ब्रॉडबैंड नहीं। हटाए गए लोगों को लॉक-अप में नहीं बल्कि अस्थायी केंद्रों में 2 से 6 घंटे रखा गया और गर्म खाना दिया गया, राजनीतिक नेताओं को SHO के चेंबर में चाय-नाश्ता दिया गया।
गृह सचिव गोविंद मोहन ने भी कहा कि उन्हें दिल्ली पुलिस से एक दिन के लिए मोबाइल इंटरनेट बंद करने का अनुरोध मिला था, जिसे कानून के अनुसार और राष्ट्रीय राजधानी में शांति बनाए रखने के लिए उचित पाया गया।
अब इस मामले पर आज 15 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है, जिसमें तय होगा कि माफी स्वीकार होती है या अवमानना की कार्यवाही आगे चलेगी।
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