3:42 pm Wednesday , 14 October 2026
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धर्मेन्द्र कश्यप ने भाजपा से इस्तीफा देकर लगाए 10 आरोप, संगठन में तानाशाही से लेकर भ्रष्टाचार तक पर उठाए सवाल

धर्मेन्द्र कश्यप ने भाजपा से इस्तीफा देकर लगाए 10 आरोप, संगठन में तानाशाही से लेकर भ्रष्टाचार तक पर उठाए सवाल

केशव गुप्ता

बरेली। आंवला-बरेली से दो बार सांसद रहे पूर्व सांसद धर्मेन्द्र कश्यप ने भाजपा की प्राथमिक और सक्रिय सदस्यता से इस्तीफा देते हुए पार्टी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अपने त्यागपत्र में उन्होंने संगठनात्मक तानाशाही, आंतरिक लोकतंत्र की कमी, पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा, परिवारवाद, गुटबाजी और कथित भ्रष्टाचार समेत 10 मुद्दों को उठाया है। उनके आरोपों का क्रमवार विवरण इस प्रकार है।
त्यागपत्र में लगाए गए 10 आरोप
1. पार्टी में तानाशाही का आरोप
धर्मेन्द्र कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा अब एक निजी कंपनी की तरह काम कर रही है, जहां तानाशाही का माहौल है। उनका कहना है कि जिन लोगों ने उनके चुनाव में उन्हें हराने के लिए काम किया था, वे आज भी पार्टी में बने हुए हैं।
2. आंतरिक लोकतंत्र की कमी
उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में संगठनात्मक चुनाव नहीं कराए जाते और पदाधिकारियों की नियुक्तियां लोकतांत्रिक प्रक्रिया के बजाय पैसे और सिफारिश के आधार पर की जाती हैं। उनके मुताबिक, पुराने कार्यकर्ताओं की बात नहीं सुनी जा रही है।
3. पिछड़ों और दलितों की उपेक्षा
कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा में पिछड़े और दलित समाज को उचित सम्मान नहीं मिल रहा है। उन्होंने अपने पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का उल्लेख करते हुए पार्टी के पुराने राजनीतिक घटनाक्रम पर भी सवाल उठाए।
4. परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप
पूर्व सांसद ने आरोप लगाया कि पार्टी के शीर्ष नेता अपने परिवार के सदस्यों को राजनीतिक रूप से स्थापित करने में लगे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उचित महत्व नहीं दिया जा रहा है।
5. मोदी-योगी के नाम पर राजनीति करने का आरोप
कश्यप ने कहा कि केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम पर तथा हिंदू-मुस्लिम मुद्दों को उठाकर हर चुनाव नहीं जीता जा सकता। उनका आरोप है कि कुछ नेता दोनों के नाम की आड़ में अपना हित साध रहे हैं और जनता को गुमराह कर रहे हैं।
6. बरेली में गुटबाजी और कथित कमीशनखोरी
उन्होंने बरेली जिले में गंभीर गुटबाजी का आरोप लगाया। त्यागपत्र में एक सवर्ण नेता पर कमीशन के जरिए धन अर्जित करने और आर्थिक ताकत के बल पर पार्टी संगठन को प्रभावित करने का आरोप लगाया गया है। कश्यप ने यह भी दावा किया कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ गुटबंदी कराई जाती है तथा कुछ अध्यक्षों को कथित तौर पर पैसे देकर प्रभावित किया जाता है। उन्होंने अध्यक्षों को एक से दो लाख रुपये प्रतिमाह दिए जाने का भी आरोप लगाया है।
7. पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी और पदों के कथित लेन-देन का आरोप
कश्यप का कहना है कि लंबे समय से पार्टी के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किनारे किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दूसरी पार्टियों से भाजपा में आए नेताओं को पैसे लेकर संगठनात्मक पद दिए जा रहे हैं।
8. चुनावी समीकरण और राज्यसभा टिकट पर सवाल
पूर्व सांसद ने दावा किया कि भाजपा बरेली मंडल की 80 प्रतिशत सीटें हारने की स्थिति में पहुंच सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन में बनाए गए राजनीतिक समीकरण पार्टी के लिए नुकसानदेह हैं। उन्होंने यूजीसी से जुड़े मुद्दों और राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए तथा आरोप लगाया कि पार्टी के कुछ शीर्ष नेता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने में लगे हैं।
9. सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार और 20 प्रतिशत कमीशन का आरोप
कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में थानों से लेकर तहसीलों तक सरकारी विभागों में व्यापक भ्रष्टाचार है। उन्होंने दावा किया कि विधायक, सांसद और ब्लॉक प्रमुखों का 20 प्रतिशत कमीशन तय है। इसके साथ ही उन्होंने बरेली नगर निगम के सालाना एक हजार करोड़ रुपये से अधिक के बजट और विकास कार्यों की जांच कराने की मांग उठाई है।
10. व्यापारी, कर्मचारी, किसान और युवाओं की परेशानी
अपने त्यागपत्र के अंतिम बिंदु में कश्यप ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में व्यापारी, कर्मचारी, किसान और युवा परेशान हैं। उनके मुताबिक, इन वर्गों की समस्याओं का उचित समाधान नहीं हो रहा है।
राज्यसभा टिकट न मिलने के बाद बढ़ी नाराजगी
धर्मेन्द्र कश्यप की नाराजगी की वजह राज्यसभा टिकट न मिलना बताई जा रही है। भाजपा ने बरेली से कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को राज्यसभा उम्मीदवार बनाया था। इसके बाद कश्यप ने सोशल मीडिया पर ‘टाटा बाय-बाय’ लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
बताया जा रहा है कि इस्तीफे के बाद वह 11 अक्टूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। उनके समर्थन में कुछ स्थानीय पदाधिकारियों के भी इस्तीफा देने की चर्चा है।
गौरतलब है कि त्यागपत्र में लगाए गए ये आरोप धर्मेन्द्र कश्यप के अपने दावे हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित व्यक्तियों या भाजपा नेतृत्व का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।

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