सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥ माँ भगवती के चतुर्थ स्वरूप माँ कूष्माण्डा के चरणों में बारम्बार प्रणाम।