पांचवें दिन भी धरना जारी रहा मालवीय आवास गृह, बदायूँ
भारतीय किसान यूनियन चढूनी गुट के जिलाध्यक्ष सतीश साहू के नेतृत्व मेंअनिश्चितकालीन धरने का पाँचवाँ दिन (13 अक्टूबर)
मुख्य मुद्दा: सरकारी भूमि, सार्वजनिक रास्तों और मुख्य नालों पर अवैध कब्जा तथा प्रशासनिक लापरवाही।
पूरा मामला क्या है?
भारतीय किसान यूनियन (चढूनी) और स्थानीय नागरिकों के अनुसार, बदायूँ में भू-माफियाओं द्वारा बड़े पैमाने पर सरकारी संपत्ति पर अतिक्रमण किया गया है, जिस पर प्रशासन सुस्त रवैया अपनाए हुए है। प्रमुख शिकायतें निम्नलिखित हैं:
सार्वजनिक रास्ता और नाला बंद: बीएसएनएल कार्यालय के पीछे नई सराय क्षेत्र में कुछ लोगों द्वारा आठ फीट चौड़े सार्वजनिक रास्ते और मुख्य नाले की जमीन पर अवैध निर्माण कर कब्जा कर लिया गया है।
आवागमन और जलभराव की समस्या: रास्ता बंद होने से आम जनता का आवागमन बाधित हो गया है। साथ ही, मुख्य नाले पर निर्माण होने से उसका अस्तित्व खतरे में पड़ गया है, जिससे भविष्य में आसपास की कॉलोनियों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है।
अस्पताल के पास अवैध निर्माण: दिलशाद अब्बासी और अन्य लोगों ने आरोप लगाया कि रास्ता बंद करके अस्पताल के पास की सरकारी जमीन पर कब्जा किया गया है, और अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर भी इसी सरकारी जमीन पर बना हुआ है।
प्रेमवती की भूमि का विवाद: भगवान दास प्रेमवती की जमीन पर हुए अवैध कब्जे को भी हटवाने और उसके त्वरित निस्तारण की मांग की गई है।
प्रमुख माँगे
निष्पक्ष पैमाइश: बीएसएनएल कार्यालय के पीछे स्थित सरकारी जमीन और सार्वजनिक रास्तों की तत्काल निष्पक्ष नाप (पैमाइश) कराई जाए।
अतिक्रमण मुक्ति: सार्वजनिक रास्तों और मुख्य नाले को तुरंत अवैध कब्जों से मुक्त कराया जाए।
सख्त कानूनी कार्रवाई: सरकारी संपत्ति और रास्तों पर कब्जा करने वाले भू-माफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
जिलाध्यक्ष सतीश साहू और जिला प्रचार मंत्री शरीफ अब्बासी ने कड़े तेवर दिखाते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द निष्पक्ष पैमाइश कराकर अवैध कब्जे नहीं हटाए गए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भाकियू (चढूनी) संगठन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। धरने में प्रमुख रूप से उपस्थित लोग
इस पाँचवें दिन के धरने में जिलाध्यक्ष सतीश साहू, शरीफ अब्बासी, बीयीशुदास, लईल अब्बासी, दिलशाद अब्बासी, यादवेंद्र सिंह, नूरुद्दीन, भगवान दास प्रेमा, परवेज, बादशाह, कल्लू, जुबैर, अबरार, सुभान, मुनव्वर, नौशाद, इस्लाम रजा, ताहिर अब्बासी, फैज अब्बासी, अरमान अब्बासी, आजम अब्बासी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक एवं संगठन के कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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