6:33 pm Tuesday , 13 October 2026
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जो केवल गृहस्थी में ही जिए, वो पृथ्वी पर पशु के समान: स्वामी रामचन्द्राचार्य जी महाराज

उझानी, बदायूं 13 अक्टूबर ।

नगर में चल रही संगीतमय श्रीमद् भागवत कथा में श्री मद्जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री रामचन्द्राचार्य जी महाराज ने भागवत महात्म्य पर दिव्य प्रवचन दिया।

महाराज जी ने कहा कि ये मानव शरीर बड़े भाग्य से भगवान से मिलने के लिए ही प्राप्त होता है। जो व्यक्ति जीवन भर केवल खेती-गृहस्थी में ही लगा रहता है, वह पृथ्वी पर पशु के समान है।


महाराज जी ने कहा कि भागवत कथा का महात्म्य यही है कि प्रेम क्या है, ये सिखाती है। सर्वोच्च प्रेम केवल परमात्मा ही है। जिसने अपने मन से मत्सर यानी ईर्ष्या को निकाल दिया है, वही भागवत कथा का सच्चा अधिकारी है।

उन्होंने कहा कि भगवान हमारे अंदर ही हैं, पर वो अंदर रहते हुए भी आपको मुक्ति नहीं करा सकते। भगवान को बाहर से कथा के माध्यम से अंदर प्रवेश कराओ, तभी मुक्ति संभव है। भगवान की कथा जीवन को ऐसे सुधारती है जैसे कोई मैले वस्त्र को साबुन से साफ कर दे।


महाराज जी ने बताया कि नेमिशारण्य भगवान का आठवां स्थान है। वहां शौनकादि ऋषि ब्रह्मा जी की आज्ञा से तपस्या कर रहे थे। सूत जी महाराज ने वहीं शौनकादि ऋषियों को पहली बार भागवत कथा सुनाई थी।

मनुष्य का परम धर्म क्या है? भगवान इस धरती पर क्यों आते हैं? बलराम जी के साथ भगवान कितने समय रहे? भगवान ने कितने विवाह किए? आदि-आदि सभी प्रश्नों का उत्तर ही श्रीमद् भागवत कथा है।

इस पावन अवसर पर महामंडलेश्वर किन्नर अखाड़ा गोरखपुर कनकेश्वरी देवी किरन बाबा ,अंजू चौहान, अमिता वार्ष्णेय, अंजू अदलक्खा, सरिता मिश्रा, रवि समदर्शी जी महाराज,प्रवीण शर्मा, देवकीनंदन शास्त्री, गोपाल शर्मा, सुधीर त्रिवेदी, कमलाकांत, लल्लू सिंह चौहान,कुंवरपाल शर्मा समेत सैकड़ों भक्तगण मौजूद रहे।

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