बदायूँ: 12 अक्टूबर। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ तथा सर्वाेच्च न्यायालय की मध्यस्थता एवं सुलह परियोजना समिति के तत्वावधान में 01 अगस्त से 30 दिसंबर 2026 तक राष्ट्र के लिए मध्यस्थता अभियान 3.0 संचालित किया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य न्यायालयों में लंबित वादों का मध्यस्थता के माध्यम से आपसी सुलह-समझौते के आधार पर अधिकाधिक निस्तारण कराना है। इस अभियान के अंतर्गत अब तक मध्यस्थता केंद्र, बदायूँ में 10 वादों में मध्यस्थता सफल रही है।
जनपद न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूँ के अध्यक्ष श्री विवेक संगल के निर्देशानुसार अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), त्वरित न्यायाधीश एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रभारी सचिव श्री अंकित रस्तोगी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत वैवाहिक विवाद, दुर्घटना दावा, उपभोक्ता विवाद, संपत्ति बंटवारा, बेदखली, भूमि अधिग्रहण, घरेलू हिंसा, चेक बाउंस तथा शमनीय आपराधिक मामलों सहित अन्य उपयुक्त दीवानी विवादों का आपसी सहमति से समाधान कराया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार एवं आमजन को जागरूक करने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, बदायूँ के कार्यालय तथा जनपद की समस्त तहसीलों में तैनात पराविधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से बैनर, पोस्टर एवं हैंडबिल वितरित किए जा रहे हैं। प्रचार सामग्री को उपयुक्त स्थानों पर चस्पा कर लोगों को मध्यस्थता के लाभों की जानकारी दी जा रही है, जिससे अधिक से अधिक वादकारी इस सुविधा का लाभ उठा सकें।
प्रभारी सचिव श्री अंकित रस्तोगी ने जनपद के समस्त नागरिकों एवं वादकारियों से अपील की कि मध्यस्थता अभियान 3.0 के अंतर्गत मध्यस्थता केंद्र में संदर्भित मामलों में संबंधित पक्षकार उपस्थित होकर आपसी बातचीत और सहमति के आधार पर अपने विवादों का निस्तारण कराएं। मध्यस्थता से विवादों का सौहार्दपूर्ण समाधान संभव है तथा इससे न्यायालयों में लंबित मामलों के निस्तारण में भी सहायता मिलती है।
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