हर साल आश्विन मास में शारदीय नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है इस बार ये उत्सव अक्टूबर में मनाया जाएगा खास बात ये है कि इस बार नवरात्रि 9 नहीं बल्कि 10 दिनों की रहेगी
मां दुर्गा की आराधना का सबसे खास पर्व शारदीय नवरात्रि इस साल अक्टूबर में मनाया जाएगा.
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है इस दौरान भक्त व्रत रखते हैं और घरों में घटस्थापना कर माता की आराधना करते हैं इस बार नवरात्रि की शुरुआत को लेकर 10 और 11 अक्टूबर को लेकर कन्फ्यूजन हो सकता है, क्योंकि प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात शुरू होगी जानें नवरात्रि से जुड़ी सभी बाते
कल से शुरू होगी शारदीय नवरात्रि
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि आज 10 अक्टूबर की रात 9:19 बजे शुरू होगी और कल 11 अक्टूबर की रात 9:30 बजे तक रहेगी.
उदया तिथि के आधार पर शारदीय नवरात्रि का पहला दिन कल 11 अक्टूबर को माना जाएगा इसी दिन मां शैलपुत्री की पूजा और घटस्थापना भी इस दिन होगी.
नवरात्रि में पहले दिन ही कलश की स्थापना करते हुए अगले नौ दिन तक मां दुर्गा की पूर्जा अर्चना की जाती है मान्यता है कि कलश में देवती-देवता वास करते हैं और इसकी स्थापना में किसी भी तरह की चूक करने से बचना चाहिए तमाम लोगों को ये कन्फ्यूजन होता है कि कलश की स्थापना कैसे करना है और कौन सा स्टेप पहले शुरू करना है
वहीं इस बात को लेकर बहुत कन्फ्यूजन होता है कि कलश को सीधे जमीन पर रखना है या फिर इसके नीचे कोई अनाज रखना है अगर अनाज रखना है तो फिर कौन सा अनाज रखना है? चलिए पंडित.संजय शास्त्री से जानते हैं कि कलश के नीचे क्या रखना चाहिए? साथ ही जानेंगे के घटस्थापना के वक्त किन गलतियों को करने से बचना है
घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कलश स्थापना के साथ ही नवरात्रि की पूजा शुरू होती है इस दिन श्रद्धालु अपनी सुविधा और पंचांग के अनुसार शुभ मुहूर्त में घट स्थापना कर सकते हैं ये हैं घट स्थापना के लिए दिन भर के शुभ मुहूर्त
घट स्थापना के लिए विशेष शुभ मुहूर्त
वृश्चिक स्थिर लग्न: सुबह 9:12 से 11:30 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:37 बजे तक
कुंभ स्थिर लग्न: दोपहर 3:17 से शाम 4:45 बजे तक
घट स्थापना के लिए चौघड़िया मुहूर्त
सुबह 7:55 से 9:18 बजे तक
सुबह 9:18 से 10:46 बजे तक
सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:14 बजे तक
दोपहर 1:41 से 3:09 बजे तक
शाम 6:04 से 7:36 बजे तक
शाम 7:36 से रात 9:09 बजे तक
रात 9:09 से 10:41 बजे तक
कलश के नीचे कौन सा अनाज रखें
नवरात्रि की कलश स्थापना में कुछ नियमों का ध्यान रखना जरूरी है पूजा के कलश को सीधे जमीन पर नहीं रखा जाता है ना ही इसे सीधे तौर पर चौकी पर रखना चाहिए इसके लिए सबसे पहले अनाजों की वेदी बनाते हैं और इसी पर कलश को रखना शुभ मानते हैं इस दौरान सात तरह के अनाजों का इस्तेमाल करना शुभ माना जाता है इसे सप्तधान्य भी कहा जाता है इसमें आप चावल, गेंहू, तिल और बाजरा समेत कई चीजें मिला सकते हैं. सबसे पहले अनाज को साफ कर लें और फिर इसकी वेदी बना दें और इसी पर कलश को रखें
नवरात्रि घटस्थापना में ना करें ये गलतियां
कलश पर रखे जाने वाले नारियल को गलत दिशा में कभी भी ना रखें इसकी सही दिशा का ध्यान जरूर दें धार्मिक मान्यता के हिसाब से जब आप पूजा करें तो नारियल की दिशा पूजा करने वाले की साइड होना चाहिए इसे कहीं पर भी ऊपर या फिर अपने पीछे की ओर ना रखें
नवरात्रि की घटस्थापना में अक्षत का इस्तेमाल होता है ऐसे में इस दौरान कोशिश करें कि चावल टूटे हुए ना हो कलश स्थापना के वक्त चावल का इस्तेमाल करते वक्त इस बात का ध्यान जरूर रखें साथ ही ध्यान रखें कि पूजा में इस्तेमाल होने वाले चावल साफ हो
नियम के अनुसार घटस्थापना वाले कलश को गलत जगह ना रखें इसके लिए घर के ईशान कोण को चुनें ज्योतिष वास्तु शास्त्र में उत्तर-पूर्व दिशा को ईशान कोण कहा जाता है अगर यहां जगह संभव नहीं है तो पूर्व दिशा में भी कलश रख सकते हैं। बस इतना ध्यान रखें कि जहां भी पूजा हो रही है वो जगह साफ हो बार-बार यहां पर किसी का हाथ नहीं लगना चाहिए
कितने दिनों की रहेगी शारदीय नवरात्रि
में नवरात्रि के दौरान तिथियों को लेकर पंचागों में अलग-अलग मत हैं विद्वानों के अनुसार इस बार अष्टमी तिथि 2 दिन रहेगी, जिससे ये पर्व 9 नहीं बल्कि 10 दिनों तक मनाया जाएगा वहीं कुछ पंचांगों में नवमी तिथि के 2 दिन होने की बातें भी विद्वानों द्वारा कही जा रही है
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी-नवमी तिथि कब है
इस बार अष्टमी तिथि 2 रहेगी, 18 और 19 अक्टूबर, इसलिए आप स्थानीय विद्वान से पूछकर महाष्टमी की पूजा कर सकते हैं वहीं नवमी तिथि 20 अक्टूबर, मंगलवार को होने से इस दिन महानवमी का पर्व मनाया जाएगा।
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