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महाराजा अग्रसेन जयंती : एक रुपया-एक ईंट से समाजवाद की नींव रखने वाले युगपुरुष।

महाराजा अग्रसेन जयंती : एक रुपया-एक ईंट से समाजवाद की नींव रखने वाले युगपुरुष।

उझानी बदायूं 10 अक्टूबर।

साभार- प्रवीण कुमार मित्तल, उपाध्यक्ष अग्रवाल सेवा समिति।

कल यानी 11 अक्टूबर को शारदीय नवरात्र की शुरुआत के साथ ही अग्रवंश के प्रवर्तक, समाजवाद के प्रणेता महाराजा अग्रसेन की 5149वीं जयंती है। यह केवल अग्रवाल समाज का पर्व नहीं, बल्कि मानवता, समानता और सहयोग का राष्ट्रीय पर्व है।

कौन थे महाराजा अग्रसेन ? –
प्रताप नगर अग्रोहा (हरियाणा) के सूर्यवंशी क्षत्रिय महाराजा वल्लभ के पुत्र अग्रसेन का जन्म द्वापर युग के अंतिम काल में हुआ था। काशी नरेश की पुत्री माधवी से विवाह के बाद उन्होंने अग्रोहा गणराज्य बसाया। कहा जाता है कि उनके राज्य में आने वाले हर नवागंतुक को बसाने के लिए नगर का हर परिवार ‘एक रुपया और एक ईंट’ देता था, ताकि वह अपना नया व्यापार और घर बना सके। यहीं से सहयोग, पूंजी और श्रम का सबसे बड़ा समाजवादी मॉडल दुनिया के सामने आया।

उनके 18 पुत्रों के नाम पर ही अग्रवाल समाज के 18 गोत्र बने, जो आज भी पूजनीय हैं – 1. गर्ग 2. गोयल 3. गोयन 4. बंसल 5. कंसल 6. सिंघल 7. जिंदल 8. मित्तल 9. टिंगल 10. तायल 11. कुच्छल 12. मधुकुल 13. नांगल 14. मंगल 15. बिंदल 16. भंडल 17. धारण और 18. ऐरण।

उनके 5 सिद्धांत आज भी प्रासंगिक – अहिंसा महाभारत युद्ध में पशु बलि देखकर उन्होंने हिंसा त्याग दी और वैश्य धर्म अपनाया।
लोकतंत्र-अग्रोहा में राजतंत्र नहीं, गणतंत्र था। फैसले पंचायत से होते थे।
आर्थिक समानता- एक रुपया-एक ईंट का सिद्धांत आज के स्टार्टअप फंडिंग और CSR से भी बड़ा विचार था।
व्यापार में ईमानदारी- ‘लाभ कम, ग्राहक ज्यादा’ का मंत्र उन्होंने दिया।
सामाजिक समरसता- उन्होंने कहा था – शासक वही जो प्रजा को संतान की तरह पाले।

आज के दौर में अग्रसेन जी की प्रासंगिकता-
आज जब देश आत्मनिर्भर भारत, लोकल फॉर वोकल और स्टार्टअप इंडिया की बात कर रहा है, तो महाराजा अग्रसेन का व्यापार दर्शन सबसे बड़ा मार्गदर्शक है। उन्होंने सिखाया कि व्यापार लूट नहीं, सेवा है। अग्रवाल समाज ने देश की जीडीपी में 25% से ज्यादा का योगदान इसी सिद्धांत पर दिया है।

उझानी-बदायूं जैसे कस्बों में अग्रवाल सेवा समिति, अग्रवाल महिला समिति द्वारा धर्मशाला, स्कूल, गौशाला, प्याऊ और अस्पताल बनवाना उसी एक ईंट-एक रुपया परंपरा का जीवंत रूप है।

जयंती केवल जश्न नहीं, संकल्प है,
महाराजा अग्रसेन जयंती पर फैंसी ड्रेस और मेहंदी प्रतियोगिता ही नहीं, हमें संकल्प लेना होगा कि हम उनके बताए मार्ग पर – नशामुक्त समाज, कन्या शिक्षा, स्वदेशी व्यापार और जरूरतमंद की मदद के लिए एक ईंट जरूर जोड़ेंगे।

महाराजा अग्रसेन अमर रहें!
जय अग्रसेन, जय अग्रोहा।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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