1:24 pm Friday , 9 October 2026
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उझानी: ‘डाकिया डाक लाया’ की आवाज तो खो गई

उझानी: ‘डाकिया डाक लाया’ की आवाज तो खो गई, पर बढ़ गया डाक विभाग का रुतबा, आज मिल रहीं 200 सेवाएं।

एक वक्त था जब गली में ‘डाकिया डाक लाया…’ की आवाज सुनकर घरों में उत्सुकता बढ़ जाती थी। मोबाइल और इंटरनेट के दौर में चिट्ठी, पोस्टकार्ड, अंतर्देशीय पत्र यादों का हिस्सा बन गए हैं, लेकिन डाक विभाग की भूमिका घटने के बजाय बढ़ गई है।

हर साल 9 अक्टूबर को मनाए जाने वाले विश्व डाक दिवस पर इस बार बदायूं में डाक विभाग के बदले स्वरूप की चर्चा तेज है। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल दौर में भी भारतीय डाक सेवा को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, इसलिए महत्वपूर्ण कागजात और प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन आज भी कूरियर के बजाय डाक से ही भेजे जाते हैं।

उझानी के श्यामबाबू शर्मा बताते हैं कि 20 साल पहले डाकिए और चिट्ठी का बेसब्री से इंतजार रहता था, दिन में दो-तीन चिट्ठियां लिखना आम बात थी। साहूकारा मोहल्ले के हेमंत कहते हैं कि पहले डाकिया खुशियों का पैगाम लेकर आता था, ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उसे सम्मान से देखा जाता था।

वरिष्ठ पोस्टमास्टर अश्विनी माहेश्वरी ने बताया कि डाक विभाग अब सिर्फ रजिस्टर्ड डाक और पार्सल तक सीमित नहीं है। अब डाकघरों में –
आधार बनवाना-अपडेट, बिजली बिल भुगतान, गंगाजल, पासपोर्ट सेवा, निर्वाचन सेवा, टूर एंड ट्रैवल, एयर-रेलवे-बस टिकट, ITI रजिस्ट्रेशन, FASTag, बीमा, AEPS, ITR मिनी सेवा, बैंकिंग समेत 200 तरह की सेवाएं एक ही छत के नीचे मिल रही हैं।

9 अक्टूबर क्यों है खास – 9 अक्टूबर 1874 को ही यूनिवर्सल पोस्टल यूनियन की स्थापना हुई थी, तभी से इस दिन को विश्व डाक दिवस के रूप में मनाया जाता है।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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