Tripti Tripathi भटकी हुई शाम को जैसे, तेरा इंतज़ार मिल जाए, सूनी हुई धड़कनों को तेरा इकरार मिल जाए ।। मेरे लफ़्ज़ों की हर धुन भी अधूरी है तुम बिन, तेरी एक नज़र से ही इश्क़ को आकार मिल जाए ।।