बदांयू में जिंदगी के सौदागर: हार्ट अटैक के इंजेक्शन में 23 हजार का खेल, 6 रुपये की पैरासिटामोल 25 में, तीमारदार ही बन रहे मरीज!
बदांयू 7 अक्टूबर।
जिंदगी देने वाली दवाओं के बाजार की मनमानी तीमारदारों को ही मरीज बना दे रही है। दवा के नाम पर खुलेआम लूट का ऐसा गोरखधंधा चल रहा है कि सुनकर आपके होश उड़ जाएंगे। बीडीएन इंडिया न्यूज़ की पड़ताल में दवाओं की कीमतों का बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है।
हजारों का खेल -हार्ट अटैक से बचाने के लिए जरूरी टेनेक्टिप्लेस (Tenectiplase) इंजेक्शन की कीमत बाजार में 30 से 35 हजार रुपये है, जबकि थोक में यही इंजेक्शन सिर्फ 12 हजार रुपये में उपलब्ध है। सोचिए, एक इंजेक्शन में 18 से 23 हजार रुपये तक का सीधा मुनाफा।
वहीं छह रुपये की गोली पच्चीस में- पैरासिटामोल जैसी सामान्य गोली (10 गोली की स्ट्रिप) थोक में सिर्फ 6 रुपये की है, लेकिन मेडिकल स्टोर पर यही 10 से 15 रुपये में बिक रही है। मंगलवार को शहर में निकली टीम को बुखार में इस्तेमाल होने वाली Dolo के पत्ते की कीमत किसी दुकान पर 15 रुपये तो कहीं 25 रुपये तक बिकती मिली।
हैरानी इस बात की है कि रिटेल की दवा दुकानों पर भी कीमत एक समान नहीं है। मेडिकल स्टोर की लोकेशन के हिसाब से दाम हैं। सबसे ज्यादा कीमत उन निजी अस्पतालों में है, जिनके परिसर में ही मेडिकल स्टोर हैं। बाहर से दवा लाने पर रोक के कारण मरीज और तीमारदार को कीमत के नाम पर लूट का शिकार होना पड़ता है।
ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में इस्तेमाल होने वाली टेल्मीकाइंड-AM की कीमत बाजार में 75 रुपये थी, इसी दवा का प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र पर मूल्य मात्र 35 रुपये है। बीपी की तरह ही शुगर की दवाओं की कीमतों में भी दुकान के हिसाब से अलग-अलग रेट मिले।
इसी तरह एल्बुमिन, एरिथ्रोपोइटिन, मेरोपेनम, सर्जिकल ड्रेसिंग और आईवी फ्लूड जैसी दवाओं और अन्य उपचार सामग्री की कीमतों में भी भारी अंतर देखने को मिला। बुखार, सिर दर्द, गले के सामान्य संक्रमण की एक जैसे साल्ट की अलग-अलग कंपनी की दवा की कीमत में बड़ा अंतर था।
दवा विक्रेताओं की दुकानों पर कीमतों की सूची चस्पा होने के निर्देश का कहीं अमल देखने को नहीं मिला। फुटकर से लेकर थोक बाजार तक और सामान्य मेडिकल स्टोर से लेकर निजी अस्पतालों के स्टोर तक कहीं भी दवा के मूल्य की लिस्ट नहीं लगी थी। यही नहीं, मेडिकल स्टोर से खरीदी गई दवा का पक्का बिल भी किसी दुकान से नहीं दिया जा रहा था। सादे कागज पर या दवा रखने की थैली पर सिर्फ कीमतें जोड़ कर बिल की औपचारिकता पूरी की जा रही थी।
दवा कारोबार में एक और बड़ा खेल दवा निर्माता कंपनी और निजी अस्पतालों-क्लीनिकों के खामोश तालमेल का है। जानकार बताते हैं कि दवा निर्माता फर्म विभिन्न अस्पतालों या बड़े मेडिकल स्टोरों को बड़े मुनाफे का लाभ देने के लिए उत्पादन लागत से कई गुना ज्यादा MRP छापकर देती हैं। दवा निर्माता और विक्रेता के बीच लाभ के इस खेल की भरपाई मरीज से सस्ती दवा मनमानी कीमत पर बेचकर की जाती है। निजी चिकित्सकों के यहां इलाज कराने वालों को मोटी फीस के साथ-साथ दवा खरीद में खासी जेब ढीली करनी पड़ती है।
इस लूट के बीच एक राहत की बात भी है। दवा के रिटेल बाजार में 30 से 35 हजार रुपये तक में बिकने वाला हार्ट अटैक से जुड़ा टेनेक्टिप्लेस इंजेक्शन जिला अस्पताल में निशुल्क लगाने की सरकारी सुविधा बड़ी राहत के रूप में सामने आई है।सरकार की इस सकारात्मक पहल से कई हृदय रोगियों को बिना बड़े खर्च के बचाया जा सका है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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