11:11 pm Tuesday , 6 October 2026
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एक ही विवाद, दो कार्रवाई: पीड़ित की FIR में 17 दिन, आरोपी की तहरीर पर तुरंत केस

SSP से शिकायत के बाद दर्ज हुई रिपोर्ट, आरोपी पक्ष की तहरीर पर रामनाथ और भाई के खिलाफ मुकदमा; 112 कॉल और CCTV जांच की मांग

कुंवर गांव संवाददाता

कुंवर गांव। हरहरपुर गांव में मारपीट के मामले में थाना कुंवर गांव पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पीड़ित रामनाथ पुत्र झब्बू लाल ने मंगलवार को SSP को प्रार्थना पत्र देकर पुलिस पर कार्रवाई में भेदभाव के आरोप लगाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रामनाथ के मुताबिक, 8 सितंबर की रात करीब नौ बजे रघुनंदन, कालीचरन और सुशीला ने उसके साथ मारपीट की। उसका आरोप है कि हमले में उसका एक हाथ टूट गया और पीठ की पसलियों में चोट आई। मेडिकल जांच में चोटों की पुष्टि होने का दावा भी उसने किया है।

घटना के बाद उसके भाई सोहनपाल ने 112 पर सूचना दी। रामनाथ के अनुसार, 112 पुलिस और चीता पुलिस मौके पर पहुंची और उसे रात करीब 9:12 बजे अस्पताल भेजा गया। उसका कहना है कि इसके करीब 18 मिनट बाद ही उसके खिलाफ मारपीट और दूसरे पक्ष को चोट पहुंचाने का मुकदमा दर्ज किया गया। घायल होने के बावजूद उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई किए जाने को लेकर उसने सवाल उठाए हैं।

FIR के लिए SSP तक पहुंचना पड़ा

पीड़ित का आरोप है कि उसने घटना के बाद पुलिस को तहरीर दी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। कार्रवाई के लिए वह कई दिनों तक थाने के चक्कर काटता रहा। स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर उसने SSP से शिकायत की।

इसके बाद 25 सितंबर को घटना के 17 दिन बाद पुलिस ने उसकी शिकायत पर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

27 दिन बाद आरोपी की तहरीर पर पीड़ित पर मुकदमा

मामले में नया मोड़ 5 अक्टूबर को आया। आरोपी पक्ष की तहरीर पर पुलिस ने रामनाथ और उसके भाई सोहनपाल के खिलाफ भी मारपीट का मुकदमा दर्ज कर लिया।

रामनाथ ने इसी कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसकी शिकायत पर FIR दर्ज करने में 17 दिन लगे, जबकि दूसरे पक्ष की शिकायत पर उसके और उसके भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया।

112 कॉल और CCTV से सामने आ सकती है सच्चाई

पीड़ित ने SSP से मांग की है कि मामले की जांच में 112 कॉल रिकॉर्ड, पुलिस के मौके पर पहुंचने का विवरण, अस्पताल के दस्तावेज और थाना व अस्पताल के आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज को शामिल किया जाए।

उसका कहना है कि इन रिकॉर्ड से घटना की वास्तविक टाइमलाइन और मौके पर मौजूद लोगों की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

रामनाथ ने पुलिस पर दूसरे पक्ष से मिलीभगत कर उसे और उसके भाई को दबाव में लेने का आरोप लगाया है। उसने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और यदि कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाए तो उसके खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

एक ही विवाद में FIR दर्ज होने में 17 दिन की देरी और उसके बाद पीड़ित व उसके भाई के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने से पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं। अब 112 रिकॉर्ड, CCTV और अस्पताल के दस्तावेज जांच में अहम कड़ी बन सकते हैं।

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