उझानी CHC में स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर: स्ट्रेचर विहीन अस्पताल, गोद में लादकर ले जाई गई तड़पती महिला।
रेफर-रेफर का खेल, ज्यादातर इमरजेंसी ट्रेनी डॉक्टरों के हवाले।
उझानी बदायूं 6 अक्टूबर ।
इसे लापरवाही कहें या सिस्टम का निकम्मापन, उझानी CHC में आज जो हुआ उसने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की पोल खोलकर रख दी। एक्सीडेंट में खून से लथपथ, दर्द से कराहती एक महिला को अस्पताल में स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हुआ। मजबूरी ऐसी कि परिजन उसे जानवरों की तरह गोद में उठाकर एंबुलेंस तक ले गए। तस्वीरें झकझोर देने वाली हैं।
——
हादसा – रेफर – और फिर वही कहानी!
फूलपुर हाईवे पर दो बाइकों की भिड़ंत में गंभीर घायल हुई अंगूरी देवी (पत्नी सुरेश, विजयानगला) को जब उझानी CHC लाया गया तो MOIC डॉ. देवेन्द्र कुमार मौर्य ने देखते ही हाथ खड़े कर दिए और राजकीय मेडिकल कॉलेज रेफर का पर्चा थमा दिया। लेकिन सवाल ये है – रेफर के बाद मरीज एंबुलेंस तक जाएगा कैसे ?
CHC पर एक स्ट्रेचर तक मौजूद नहीं था! इमरजेंसी से एंबुलेंस तक महज 20 कदम की दूरी के लिए तीन लोगों को महिला को गोद में उठाना पड़ा। महिला की साड़ी अस्त-व्यस्त, शरीर लहूलुहान, अगर तीमारदारों के हाथ से फिसल जाती तो क्या होता, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं।
——–
बदायूं की सबसे फिसड्डी CHC है उझानी!
ग्रामीणों में गुस्सा है। लोगों का कहना है – उझानी CHC अस्पताल नहीं, सिर्फ रेफरल पर्ची बांटने का अड्डा बन गई है। जिले में सबसे ज्यादा रेफर अगर कहीं से होते हैं तो वो उझानी से ही होते हैं।
क्यों? क्योंकि यहां -न एक्सरे ढंग से चलता है, न जरूरी दवाएं हैं।
विशेषज्ञ डॉक्टर तो दूर, इमरजेंसी में अक्सर मेडिकल कॉलेज के ट्रेनी ही भगवान बने बैठे रहते हैं।
एडमिट करने की हिम्मत ही नहीं, आते ही कह दिया जाता है – बदायूं ले जाओ।
————-
सवाल बड़ा है – जब स्ट्रेचर तक मुहैया नहीं करा सकते तो करोड़ों का बजट जा कहां रहा है ? क्या CMO साहब और शासन को इस बदहाली की भनक नहीं ? या फिर किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार है ?।
राजेश वार्ष्णेय एमके



bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com