3:51 pm Tuesday , 6 October 2026
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बदायूं में आशाओं ने फूंका हड़ताल का बिगुल

बदायूं में आशाओं ने फूंका हड़ताल का बिगुल: 7 फरवरी के 13 सूत्रीय समझौते पर सरकार मुकरी।

2018 से 1 रुपया तक नहीं मिला, अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान।

उझानी बदायूं 6 अक्टूबर ।

जनपद की स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ कही जाने वाली आशा और आशा संगिनियों का सब्र अब टूट गया है। अपनी मांगों को लेकर उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन और उत्तर प्रदेश आशा संगिनी वर्कर्स यूनियन ने एक साथ मोर्चा खोल दिया है और CHC से लेकर CMO कार्यालय तक धरना-प्रदर्शन और अनिश्चितकालीन कार्य बहिष्कार का ऐलान कर दिया है।

यूनियन ने प्रभारी चिकित्साधिकारी और मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजे गए ज्ञापन में साफ लिखा है कि अगर उनकी मांगे नहीं मानी गईं तो वे हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगी।

यूनियन का आरोप है कि 7 फरवरी 2026 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री और यूनियन पदाधिकारियों के बीच हुए 13 सूत्रीय समझौते को ठोस रूप से आज तक लागू नहीं किया गया। समझौते में-आधारभूत मानदेय 1500 से बढ़ाकर 7500 करने,
मातृत्व अवकाश देने, जीवन बीमा राशि 2 लाख से बढ़ाकर 10 लाख और 5 लाख का अतिरिक्त कैशलेस स्वास्थ्य बीमा कवर देने,वर्षों से बकाया प्रोत्साहन राशि का पूरा भुगतान करने पर सहमति हुई थी।

इसके लिए अपर प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में कमेटी भी बनी, लेकिन रिपोर्ट के बाद अंतिम बैठक आज तक नहीं बुलाई गई।

यूनियन ने लगाए गंभीर आरोप-कहा आयुष्मान कार्ड, आयुष्मान गोल्डन कार्ड में 2018 से किए गए काम का आज तक 1 रुपया भी अदा नहीं किया गया।
केंद्र सरकार द्वारा कोविड-19 में घोषित 1000 रुपये प्रतिमाह की राशि लगभग भुला दी गई।
कुष्ठ रोग, टीबी, फाइलेरिया, नसबंदी सहित अनेकों कार्यों की प्रोत्साहन राशि अटकी हुई है।
आभा (ABHA) आईडी सृजन में 1 जनवरी 2023 से योगदान का भुगतान 2023 के बजाय मात्र 2024 का आधा-अधूरा किया गया।
अवैध वसूली और हेर-फेर बदस्तूर जारी है। नसबंदी का भुगतान लंबे समय से लंबित है।

वहीं 5 अक्टूबर को सौंपे गए दूसरे ज्ञापन में आशा संगिनी जिलाध्यक्ष सुधा रानी ने मांग की है कि संगिनी को 20% वार्षिक बढ़ोतरी और महंगाई को देखते हुए 24,000 फिक्स मानदेय, आशा को 20,000 मानदेय, सभी को राज्य कर्मचारी का दर्जा और समान कार्य-समान वेतन लागू किया जाए।

आशाओं ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द भुगतान और मानदेय वृद्धि नहीं हुई तो जिले भर की आशाएं अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चली जाएंगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

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