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6 माह पुराने मामले में पीड़ित का आरोप पुलिस ने उल्टा पीड़ित को ही थाने में बिठाया!
उझानी, बदायूं 6 अक्टूबर ।
कोतवाली उझानी पुलिस की कार्यशैली पर कोर्ट ने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। पुलिस ने पीड़ित की सुनवाई नहीं की तो पीड़ित न्यायालय की शरण में पहुंच गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, बदायूं के प्रार्थना पत्र के आदेश पर आखिरकार थाना उझानी में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ है।
मामला ग्राम छतुइया का है। पीड़ित राजू शर्मा पुत्र हरिवलाल शर्मा ने न्यायालय में दायर प्रार्थना पत्र में बताया कि 06 मार्च को रात 8 बजे वह घर पर अकेला था, तभी गांव के ही पिन्टू और रिन्कू अपने कुछ अज्ञात साथियों के साथ उसके दरवाजे पर आ धमके। कारण पूछने पर आरोपियों ने उसे बेरहमी से मारना-पीटना शुरू कर दिया और घर में घुसकर अलमारी में रखे पांच लाख रुपये निकाल ले गए।
पीड़ित ने डायल 112 पर कॉल की तो पुलिस मौके पर आई और उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। लेकिन पीड़ित का आरोप है कि अगले दिन 08 मार्च को पुलिस ने उसे थाने बुलाकर करीब 3 घंटे तक बैठाए रखा, कोई कार्रवाई नहीं की और उल्टा समझौता करने का दबाव बनाया।
इतना ही नहीं, दरोगा जी ने जबरन कोरे कागजों पर हस्ताक्षर भी करा लिए और कहा कि अब पिन्टू-रिन्कू के खिलाफ कोई शिकायत नहीं करोगे।
गुंडागर्दी यहीं नहीं रुकी उसी रात आरोपी के गुर्गे फिर घर में घुस आए और घरेलू सामान में तोड़फोड़ की। उस वक्त घर पर पीड़ित की भतीजी गुनगुन अकेली थी, जिसने रात 12 बजे डायल 112 को सूचना दी। पुलिस ने मौके की फोटोग्राफी भी की।
इसके बाद 15 अप्रैल को रात रिन्कू, पिन्टू और उनके गुर्गों ने नाजायज हथियारों के बल पर घर में घुसकर जान से मारने की धमकी दी। उस वक्त पीड़ित की मां घर पर अकेली थीं। आरोपियों ने मां से बीस लाख रुपये की फिरौती भी मांगी और धमकाया कि भविष्य में कोई घटना होती है तो इसके जिम्मेदार यही लोग होंगे।
थाना पुलिस से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बदायूं तक प्रार्थना पत्र देने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायालय के आदेश पर SHO को उचित धाराओं में अभियोग पंजीकृत करने का आदेश दिया गया, जिसके अनुपालन कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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