11:51 am Tuesday , 6 October 2026
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बिल्सी। ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में श्रीमद्भागवत कथा

गर्भस्थ जीवन की रक्षा करना ही सच्ची मानवता : आचार्य रामचंद्राचार्य
बिल्सी। नगर के ज्वाला प्रसाद जैन स्कूल में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन कथावाचक आचार्य रामचंद्राचार्य ने गर्भस्थ जीवन की रक्षा और संस्कारों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मनुष्य को जीवन ईश्वर की अमूल्य देन है। गर्भ में पल रहे जीव की हत्या करना महापाप है। ऐसे कर्म का जीवन में कोई सहज प्रायश्चित नहीं बताया गया है। आचार्य ने कहा कि समाज में बढ़ती स्वार्थ की प्रवृत्ति के कारण मनुष्य अपने कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों को भूलता जा रहा है। हमें यह समझना होगा कि प्रत्येक जीवन का अपना महत्व है। गर्भस्थ शिशु भी जीवन का स्वरूप है, इसलिए उसकी रक्षा करना माता-पिता और समाज की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी में ऐसा निर्णय नहीं लेना चाहिए, जिससे किसी निर्दोष जीवन का अंत हो जाए। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज को सही दिशा देने का माध्यम भी है। कथा से हमें दया, करुणा, सत्य, संयम और संस्कारों की सीख मिलती है। माता-पिता बच्चों को अच्छे संस्कार दें और उन्हें धर्म तथा मानवता के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करें। कथा के दौरान आचार्य ने भगवान की विभिन्न लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि मनुष्य को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए। भजनों पर श्रद्धालुओं ने भावविभोर होकर जयकारे लगाए। इस मौके पर बालाजी धाम के प्रधान महंत मटरूमल शर्मा महाराज, प्रदीप शर्मा, संजीव शर्मा, नरेंद्र गरल, डा.राजाबाबू वार्ष्णेय, सुभाष वाहेती, ममता राठी, मुकेश गुप्ता, पुष्कीन माहेश्वरी, सरिता माहेश्वरी, रंजन माहेश्वरी, जितेंद्र कुमार, राजेश कुमार, प्रवीण वार्ष्णेय आदि का विशेष सहयोग रहा।

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