पहला ग्रास पितरों के नाम: उझानी में कौए, गाय और श्वान को खिलाकर याद किए जा रहे पूर्वज, आंखें हुई नम।
उझानी, बदायूं 5 अक्टूबर ।
श्राद्ध पक्ष आते ही उझानी की गलियां एक अनोखी कृतज्ञता और भावुकता से भर गई हैं। यह सिर्फ पिंडदान नहीं, अपने उन पूर्वजों को याद करने का पर्व है, जिनकी वजह से आज हम हैं।
नगर में सुबह होते ही हर घर की छतों पर एक ही दृश्य दिख रहा है। परिवार का मुखिया हाथ में पितरों के नाम की थाली लेकर पहला ग्रास निकाल रहा है। कोई कौए को बुला रहा है तो कोई दरवाजे पर खड़ी गाय को रोटी खिला रहा है।
मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष में हमारे पितर कौए के रूप में धरती पर आते हैं। जब तक कौआ ग्रास ग्रहण नहीं करता, परिवार इंतजार करता है। जैसे ही कौआ निवाला लेता है, घर में सुकून की लहर दौड़ जाती है कि पितरों ने भोग स्वीकार कर लिया।
गाय को ग्रास खिलाकर वैतरणी पार करने की कामना और कुत्ते को खिलाकर यम के द्वार से रक्षा की प्रार्थना की जा रही है। बुजुर्ग बता रहे हैं – जिंदा में तो सब सेवा कर लेते हैं, असली श्राद्ध तो जाने के बाद याद करना है।
वाकई, उझानी में इस बार श्राद्ध, कर्मकांड से ज्यादा पितरों के प्रति सम्मान और आभार का पर्व बन गया है।
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