4:11 pm Monday , 5 October 2026
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उझानी में परिवहन विभाग कुंभकर्णी नींद में

उझानी में बच्चों की जिंदगी से खिलवाड़: ईको में भूसे की तरह ठूंसे जा रहे नौनिहाल, परिवहन विभाग कुंभकर्णी नींद में।

उझानी, बदायूं 5 अक्टूबर ।

क्या आपके बच्चे की जान की कीमत सिर्फ 500 रुपये महीना है ? अगर आप उझानी की सड़कों पर सुबह-शाम निकलें तो जवाब हां में मिलेगा।

नगर में स्कूल वैन के नाम पर दौड़ रही मारुति ईको कारों में भेड़-बकरियों की तरह, भूसे की तरह नन्हे-मुन्ने बच्चों को ठूंस-ठूंस कर स्कूल पहुंचाया जा रहा है। एक ईको जिसमें 5 सवारी की अनुमति है, उसमें 15 से 18 बच्चे लादे जा रहे हैं। जरा सी खिड़की से झांकते इन मासूम चेहरों में डर साफ दिखता है, लेकिन स्कूल संचालकों की जेबें गर्म हो रही हैं।

हैरानी की बात है कि बदायूं जिले के परिवहन विभाग के अफसरों को नगर में खुलेआम दौड़ रहे ये ओवरलोड वाहन दिखाई ही नहीं देते। जब भी इस बाबत बात करो तो उनका एक ही रटा-रटाया जवाब होता है – “हम देख रहे हैं, देखेंगे, कार्रवाई की जा रही है।” कार्रवाई के नाम पर एक-दो वाहनों का चालान कर खानापूर्ति कर दी जाती है और विभाग फिर से गहरी नींद में सो जाता है।

इस पूरे खेल में बच्चों को स्कूल भेजने वाले अभिभावक भी बराबर के दोषी हैं। उन्हें ये नहीं दिखता कि उनके जिगर का टुकड़ा किस हालत में, कितने जोखिम के साथ स्कूल आ-जा रहा है। सस्ते किराए के चक्कर में वे अपने ही बच्चों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।

अगर कल को कोई बड़ा हादसा होता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? स्कूल, परिवहन विभाग या अभिभावक? प्रशासन को तत्काल इस पर सख्त अभियान चलाने की जरूरत है।

राजेश वार्ष्णेय एमके

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