बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जिले की सियासत में इन दिनों एक ऐसे पुराने राजनीतिक चेहरे को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, जिनका राजनीतिक सफर अलग-अलग दलों के बीच आवाजाही के लिए चर्चा में रहा है। राजनीतिक गलियारों में उन्हें चर्चित अंदाज में ‘चचा इलाहाबादी’ कहकर संबोधित किया जा रहा है। विदित रहे कि कांग्रेस से जिले की राजनीति में सक्रिय होने वाले चचा इलाहबादी ने समाजवादी पार्टी का रुख कर लिया था और सपा में लंबी राजनीतिक पारी खेली। इसके बाद टिकट कटने पर परिस्थितियां बदलीं तो कांग्रेस में वापसी कर ली थी। बदायूं की राजनीति में उनके अगले कदम को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सपा के अंदर उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं होने की बात कही जा रही है। कुछ कार्यकर्ताओं के बीच सवाल है कि क्या ‘चचा इलाहाबादी’ बदायूं की राजनीतिक पिच पर आगे भी सक्रिय रहेंगे या फिर एक बार फिर किसी नए राजनीतिक ठिकाने की तलाश करेंगे।
राजनीतिक चर्चाओं में कहा जा रहा है कि इलाहाबाद का नाम भले प्रयागराज हो गया पर पता नहीं चचा इलाहाबादी बदायूं की राजनीति से कब त्याग राज कहेगे।
हालांकि चर्चाओं के बीच संबंधित नेता की ओर से चचा के अगले राजनीतिक कदम को लेकर स्पष्ट सार्वजनिक घोषणा सामने नहीं है और ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में चचा बदायूं की राजनीति में अपनी सक्रियता जारी रखते हैं या राजनीतिक सफर को कोई नया मोड़ देते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि चचा इलाहाबादी बदायूं की सियासी पिच पर अगली पारी खेलेंगे या किसी नए राजनीतिक सफर की ओर बढ़ेंगे? इसका जवाब आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम से स्पष्ट होगा।
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