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बेटी का जन्मप्रमाण ढूंढने गया पिता, खुल गया 15 लाख का फर्जी प्रमाण पत्र रैकेट

बेटी का जन्मप्रमाण ढूंढने गया पिता, खुल गया 15 लाख का फर्जी प्रमाण पत्र रैकेट!

बदायूं 3 अक्टूबर।

अगर विक्रमपुर चरसौरा के बाबू सिंह अपनी बेटी का खोया जन्म प्रमाण पत्र निकलवाने नगर पंचायत न पहुंचे होते, तो शायद यूपी का सबसे बड़ा फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र रैकेट कभी उजागर ही नहीं होता।

बाबू सिंह अपनी बेटी दुर्गा का रिकॉर्ड ढूंढने रुदायन नगर पंचायत पहुंचे थे। कार्यालय में उनकी बेटी का कोई रिकॉर्ड ही नहीं मिला। पूछताछ में उन्होंने बताया कि उन्होंने इस्लामनगर में चंदौसी रोड पर चरसौरा निवासी नईम के जनसेवा केंद्र से तीन हजार रुपये देकर प्रमाण पत्र बनवाया था। शक होने पर जब नगर पंचायत के पोर्टल की जांच शुरू हुई तो होश उड़ाने वाला सच सामने आया।

रुदायन नगर पंचायत की जन्म-मृत्यु पंजीकरण पोर्टल की ID साइबर कैफे और जनसेवा केंद्रों पर धड़ल्ले से चल रही थी। इस ID से सिर्फ रुदायन या इस्लामनगर ही नहीं, बल्कि गोंडा, अलीगढ़, शाहजहांपुर, बरेली, संभल, मुरादाबाद तक के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे। इसके लिए लोगों से 3 हजार से 18 हजार रुपये तक वसूले जा रहे थे।

जांच में पता चला कि नगर पंचायत के पूर्व कंप्यूटर ऑपरेटर वरुण ने ही इस्लामनगर, रुदायन समेत कई जनसेवा केंद्र संचालकों को ID-पासवर्ड बेच रखा था। ईओ की तहरीर पर पुलिस ने वरुण के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। अब पुलिस पूरे गिरोह की तलाश में जुटी है।

पहले पोर्टल से 164 प्रमाण पत्र बनाए गए। शिकायत के बाद ID-पासवर्ड बदल दिए गए, लेकिन फर्जीवाड़ा नहीं रुका। पता चला कि वरुण के पास नगर पंचायत की ईमेल का भी पासवर्ड था, जिससे उसने नया पासवर्ड भी हैक कर लिया।

28 सितंबर की रात से 29 सितंबर की सुबह तक तो फर्जीवाड़े की बाढ़ आ गई। शिकायत की भनक लगते ही आरोपियों ने एक ही जगह बैठकर रात भर में 91 प्रमाण पत्र बना डाले।

अब तक कुल 255 फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की बात सामने आई है। औसतन 5 से 7 हजार रुपये प्रति प्रमाण पत्र के हिसाब से यह गिरोह 15 लाख से ज्यादा का खेल कर चुका है। पुलिस ने सभी फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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