Nita Vasave मुझे भी जानना हैं श्याम …. मेरे हाथों में ऐसी कौनसी लकीर अधूरी हैं…. कि ख़ुशियाँ सामने होकर भी, मेरी नहीं होती…. और हर चाहत के लिए मुझे तड़पना पड़ता हैं…