
Jaya
Jaya Kishori
कुंडली के बिना फलित ज्योतिष अधूरा माना जाएगा। ऐसे तो इसका प्रयोग विवाह के लिए किया जाता है। लेकिन पराशर जी इसे जन्म कुंडली से भी ज्यादा महत्वपूर्ण माना है। यह शाश्वत कुंडली है जिससे सभी ग्रहों का बल जानते हैं। इस बावत कुछ सूत्र याद करने लायक है
1. नवमांश में उच्च ग्रह बहुत शुभ माना जाता है। भले ही वह राशि लग्न कुंडली में नीच की हो।
2. नवमांश में नीच ग्रह अशुभ माना जाता है। चाहे वह लग्न कुंडली में उच्च का हो।
3. वर्गोत्तम ग्रह बली होता है। यह पद और प्रसिद्धि प्रदान करता है। एक नीच लेकिन वर्गोत्तम ग्रह भी धन और प्रसिद्धि देता है। भले ही शुरू में शारीरिक या मानसिक कष्ट देता हो।
4. कुंडली के छठे, आठवें और बारहवे यानी त्रिक भाव में बैठा नीच का ग्रह वर्गोत्तम हो जाए तो उस भाव का सर्वोच्चतम फल देता है।
5. नवमांश में ग्रह जन्म कुंडली के केंद्र या त्रिकोण राशि में स्थित होने से शुभ फल देता है।
6. नवमांश को तीन भागों में बांटा गया है।
क. अदृढ़ – नवमांश में चार राशि को अदृढ़ माना गया। इसके द्वारा दिए गए प्रारब्ध को आसानी से बदला जा सकता है।
ख. दृढ़ राशि – नवमांश चार्ट में स्थिर राशि दृढ़ मानी जाती है। इसके द्वारा दिए गए प्रारब्ध को नहीं बदला जा सकता है।
ग. दृढ़-अदृढ़ राशि – द्वी स्वभाव राशि दृढ़-अदृढ़ है। इसके द्वारा दिए गए प्रारब्ध को प्रयत्न के द्वारा बदला जा सकता है
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