बदायूं में बड़ा राजस्व संकट: 150 हल्कों से लेखपालों ने छोड़ा चार्ज, ठप पड़े आय-जाति और खतौनी के काम।
तहसीलों में भटक रहे किसान।
बदायूं 1 अक्टूबर।
जिले में लेखपालों की कमी और सात सूत्रीय मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन ने आम जनता की मुसीबत बढ़ा दी है। लेखपाल संघ ने जिले के 150 से अधिक अतिरिक्त हल्कों का चार्ज छोड़ दिया है। इससे आय, जाति, निवास, खतौनी, वरासत और नामांतरण जैसे सभी राजस्व कार्य पूरी तरह ठप हो गए हैं। तहसीलों में रोज सैकड़ों लोग भटक रहे हैं।
जिले में लेखपालों के कुल 458 हल्के स्वीकृत हैं, जबकि मौके पर मात्र 308 लेखपाल ही तैनात हैं। यानी 150 हल्के पहले से ही खाली हैं। इस कमी को पूरा करने के लिए हर लेखपाल को 10 से 12 ग्राम पंचायतों का अतिरिक्त चार्ज दिया गया था।
लेखपालों का कहना है कि उन पर पहले से ही वरासत, नामांतरण, पैमाइश, ई-गवर्नेंस, आपदा, चुनाव और कानून-व्यवस्था का ओवरलोड है। बिना संसाधन के ग्राम सचिवालय में रोस्टर ड्यूटी और महीनों से भत्ते न बढ़ने से आक्रोश बढ़ गया। इसी के चलते उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ ने 22 सितंबर से अतिरिक्त हल्कों के बहिष्कार का ऐलान किया और सभी बस्ते तहसील में जमा कर दिए।
प्रशासन ने खाली हुए 150 हल्कों का चार्ज कानूनगो को देना शुरू किया है, लेकिन एक कानूनगो पर पहले से ही पर्यवेक्षण और रिपोर्टिंग का जिम्मा है। गांव-गांव जाकर जांच करना उनके लिए भी संभव नहीं हो पा रहा, जिससे राजस्व की पूरी चेन फेल हो गई है।
बदायूं, बिसौली, दातागंज, सहसवान और बिल्सी सभी पांच तहसीलों में आय, जाति, निवास, खसरा-खतौनी के आवेदन लेखपाल की रिपोर्ट न लगने से लंबित पड़े हैं।
लेखपाल संघ के जिलाध्यक्ष भोजराज सिंह यादव ने कहा – हमारा उद्देश्य जनता को परेशान करना नहीं है, शासन का ध्यान अपनी न्यायोचित मांगों पर खींचना है। 12 सितंबर को मुख्य सचिव को डीएम के माध्यम से ज्ञापन भेजा था, 45 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो चार्ज छोड़ना पड़ा।
एडीएम प्रशासन मानवेंद्र सिंह ने कहा – यह प्रदेश स्तरीय समस्या है, बातचीत चल रही है। एक-दो दिन में हल निकल आएगा, लोगों को धैर्य बनाए रखना चाहिए।
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