8:58 am Wednesday , 30 September 2026
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घर का वास्तु और पितरों से संबंधित दिशायें – Jaya Kishori

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Jaya__Kishori__

घर का वास्तु और पितरों से संबंधित दिशायें

बहुत अच्छा विषय है आजका क्योंकि, इसी विषय पर हम प्राय: भ्रामक स्थिति में रहते हैं।
वास्तु शास्त्र में पितरों का स्थान बहुत पवित्र और निश्चित माना गया है

1. मुख्य दिशा – दक्षिण
दक्षिण दिशा को *पितरों की दिशा* और यम की दिशा कहते हैं।
पितरों के फोटो, पितृ-स्थान, पितृ- पूजा इसी दिशा में करना सबसे शुभ है
फोटो लगाते समय – फोटो का मुँह उत्तर की ओर होना चाहिये, ताकि पूजा करने वाले का मुँह दक्षिण की ओर रहे

2. दूसरा सर्वश्रेष्ठ – नैऋत्य कोण (दक्षिण-पश्चिम)*
यह पितरों की स्थायी और स्थिर ऊर्जा का कोना है।
यहाँ पितरों की फोटो, अस्थि-कलश, या यादगार वस्तुएं रख सकते हैं।
यह कोना भारी और ऊँचा होना चाहिये

वास्तु के अनुसार क्या करें:
पितृ-तर्पण / श्राद्ध: घर के दक्षिण भाग में या आंगन में दक्षिण की ओर मुख करके करें।
अगरबत्ती / दीपक: दक्षिण-पूर्व कोने में जलाना बहुत शुभ है – सुगंध से पितर प्रसन्न होते हैं।
तिजोरी / मुख्य बीम: दक्षिण दीवार पर पितरों की कृपा से ही धन टिकता है, ऐसा माना जाता है
तुलसी और पीपल: दक्षिण में पीपल लगाना पितरों को मोक्ष देता है

क्या न करें
पितरों की फोटो को कभी भी पूजा-स्थान (ईशान कोण उत्तर-पूर्व) में, बेडरूम में, या रसोई में न लगाएं।
उत्तर और पूर्व दिशा देवताओं की है, वहाँ पितृ फोटो लगाने से ऊर्जा में टकराव होता है।
फोटो को लटकता हुआ या जमीन के पास न रखें, थोड़ा ऊँचाई पर सम्मान के साथ रखें

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