Tripti Tripathi
उसने कहा- मंज़िल लिखो,
मैंने लिखा- “तृप्ति” की राहें ।।
उसने कहा- सुकून लिखो,
मैंने लिखा- “तृप्ति” की बाहें ।।
उसने कहा- इबादत लिखो,
मैंने लिखा- “तृप्ति” का नाम ।।
उसने कहा- ज़िंदगी लिखो,
मैंने लिखा- “तृप्ति” की हर एक सुबह ।।
Good morning_X
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@TripathiTr29500
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