3:50 pm Sunday , 27 September 2026
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बिल्सी – साप्ताहिक सत्संग में कर्म, ज्ञान और उपासना का बताया महत्व

साप्ताहिक सत्संग में कर्म, ज्ञान और उपासना का बताया महत्व

कठोर परिश्रम, सद्ज्ञान और उपासना से ही होता है मनुष्य का उत्थान : आचार्य संजीव रूप

बिल्सी , तहसील क्षेत्र के यज्ञतीर्थ गुधनी में स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग का आयोजन हुआ। यज्ञ के ब्रह्मा एवं अंतर्राष्ट्रीय वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ संपन्न कराया तथा ऋग्वेद के प्रथम मंडल के 101वें सूक्त के मंत्रों से श्रद्धालुओं को आहुतियां दिलाईं।
इस अवसर पर मंत्रों की व्याख्या करते हुए आचार्य संजीव रूप ने कहा कि *कठोर परिश्रम, सद्ज्ञान और उपासना—इन तीनों के समन्वय से ही मनुष्य का वास्तविक और सर्वांगीण उत्थान संभव है। उन्होंने समझाया कि जीवन में इनका संतुलित अनुपात भी महत्वपूर्ण है। व्यक्ति को लगभग 80 प्रतिशत कर्म, 4 प्रतिशत ज्ञान और 16 प्रतिशत उपासना के भाव के साथ जीवन जीना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल कर्म और ज्ञान से मनुष्य शक्तिशाली एवं साधन-संपन्न तो बन सकता है, लेकिन यदि उसके जीवन में ईश्वर की उपासना और आत्मसंयम का अभाव हो तो अहंकार तथा अन्य दुर्गुण उसे पतन की ओर ले जा सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए रावण के चरित्र का उल्लेख किया और कहा कि उसके पास ज्ञान तथा सामर्थ्य था, किंतु उपासना एवं सदाचार के अभाव में उसका अहंकार बढ़ता गया और अंततः उसका तथा उसके कुल का विनाश हुआ।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि उपासना मनुष्य के भीतर के अहंकार को समाप्त करती है और ईर्ष्या, द्वेष, काम, क्रोध, लोभ, मोह तथा विभिन्न दुर्व्यसनों पर नियंत्रण करने की शक्ति प्रदान करती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को परिश्रम के साथ सद्ज्ञान अर्जित करना और ईश्वर की उपासना के लिए प्रतिदिन समय निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ज्ञान की वृद्धि के लिए सद्गुरुओं एवं वैदिक विद्वानों के सान्निध्य में बैठना तथा श्रेष्ठ ग्रंथों का अध्ययन करना चाहिए। साथ ही ईश्वर की उपासना, प्रार्थना और आत्मचिंतन के लिए प्रतिदिन कम से कम एक घंटा अवश्य निकालना चाहिए।
साप्ताहिक सत्संग में श्रीमती लीलावती देवी एवं सुरेश चंद्र आर्य यजमान रहे। इस अवसर पर विचित्रपाल सिंह , श्रीमती सूरजवती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती गुड्डो देवी, कुमारी कौशकी आर्या, कुमारी तान्या आर्या, कुमारी गौरी आर्या, कुमारी अंशिका आर्या, कुमारी वंशिका आर्या, कुमारी हिमांशी आर्या सहित आर्य संस्कारशाला के अनेक बच्चे उपस्थित रहे।

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