उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के साथ हुआ दसलक्षण पर्व का समापन
बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या दो स्थित चंद्र प्रभु दिगंबर जैन मंदिर में शनिवार को दस लक्षण महापर्व का दसवां दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के रूप में श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। सुबह शांति धारा, पूजन, भजन और आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आत्मशुद्धि और धर्म के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
संध्या के समय निखिल जैन ने प्रवचन करते हुए कहा कि जैन दर्शन में ब्रह्मचर्य को मोक्ष और आत्मशुद्धि की अंतिम सीढ़ी माना गया है। इसका पालन केवल शारीरिक संयम तक सीमित नहीं है, बल्कि मन, वचन और काया से काम, क्रोध, लोभ, माया सहित सभी प्रकार के इंद्रिय विषयों से विरक्त होना ही सच्चा ब्रह्मचर्य है। इससे आत्मा कर्मों के मल से मुक्त होकर निर्मल बनती है। इसके बाद ममता जैन ने भक्ति भाव से अपने विचार व्यक्त किए और समाज के लोगों को धर्म के सिद्धांतों को जीवन में अपनाने का संदेश दिया। कार्यक्रम में जैन समाज के अध्यक्ष टीटू जैन, अनिल जैन सोनी, नीरज जैन, अजीत जैन, सुरेंद्र जैन, सुनील जैन, प्रमोद जैन, नीरेश जैन, मोना जैन, प्रीति जैन, आरती जैन, दिव्या जैन, पूजा जैन, नीलू जैन, रेखा जैन, ममता जैन आदि मौजूद रहे।
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