बीमार हुए तो डॉक्टर नहीं, AI से पूछ रहे दवा: गूगल-चैटबॉट के चक्कर में खुद बन रहे डॉक्टर।
जानलेवा साबित हो सकता है ये नया ट्रेंड।
उझानी-बदांयू 26 सितंबर।

बुखार, सिरदर्द, पेट दर्द और कमजोरी… लक्षण दिखे नहीं कि लोग डॉक्टर के पास जाने की बजाय सीधे मोबाइल निकालकर AI चैटबॉट से पूछने लगे – इसकी कौन सी दवा लेनी है?
लक्षण बताओ, AI से दवा पूछो और खुद ही इलाज शुरू कर दो। जिले में यह नया ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है, जिसे विशेषज्ञों ने सेहत के लिए बेहद जोखिम भरा बताया है।
जिला फार्मासिस्ट एसोसिएशन के नथन सिंह ने बताया कि गूगल या AI पर लक्षण पढ़कर खुद बीमारी तय करना सुरक्षित नहीं है। एक जैसे लक्षण कई अलग-अलग बीमारियों में दिखाई दे सकते हैं। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
उन्होंने कहा – AI बुखार के बारे में दवा की जानकारी दे सकता है, लेकिन बुखार किस कारण हुआ, यह तय नहीं कर सकता। दवा की खुराक और अवधि भी हर मरीज की स्थिति के अनुसार अलग होती है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना दवा लेना उचित नहीं है।
वही चिकित्सकों ने कहा कि मरीजों को अपनी मर्जी से दवा नहीं लेनी चाहिए। मेडिकल स्टोर संचालक को दवाओं की जानकारी होती है, लेकिन गंभीर बीमारी का इलाज अपने स्तर से करना उचित नहीं है।
आजकल पैटर्न बन गया है – मोबाइल पर बीमारी के लक्षण खोजे, फिर सीधे मेडिकल स्टोर पहुंचकर दवा ले ली। कुछ लोग पुराने पर्चे या पहले इस्तेमाल की गई दवा भी दोबारा शुरू कर देते हैं। न खुराक का पता, न अवधि का, न दूसरी दवाओं के साथ उसके रिएक्शन का।
जिले में दवा की थोक और फुटकर करीब एक हजार दुकानें हैं। फुटकर दुकानों पर फार्मासिस्ट बैठते हैं, लेकिन हर दुकान पर विशेषज्ञ नहीं मिलते।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डॉ आरके वर्मा ने बताया कि इंटरनेट से स्वास्थ्य संबंधी सामान्य जानकारी हासिल की जा सकती है, लेकिन इसे चिकित्सकीय निदान का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। लगातार बने रहने वाले, बढ़ते या गंभीर लक्षणों में खुद से दवा लेना भारी पड़ सकता है।
उन्होंने सलाह दी कि AI जानकारी देगा, इलाज नहीं, डॉक्टर के पास जाओ।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com


