बिल्सी। नगर के मोहल्ला संख्या दो स्थित प्राचीन चंद्रप्रभु दिगंबर जैन मंदिर में शुक्रवार को दसलक्षण महापर्व के नौवें दिन उत्तम आकिंचन धर्म मनाया गया। सुबह शांतिधारा, पूजन, भजन और आरती के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ हुआ। शाम को निखिल जैन ने प्रवचन में कहा कि उत्तम आकिंचन धर्म दसलक्षण धर्म का नौवां महत्वपूर्ण धर्म है। यह मनुष्य को सिखाता है कि आत्मा के आंतरिक गुणों के अतिरिक्त संसार में कोई भी वस्तु अपनी नहीं है। केवल बाहरी वस्तुओं का त्याग करना ही आकिंचन धर्म नहीं, बल्कि मन से उनके प्रति ममत्व और मोह का भाव छोड़ना ही इसकी वास्तविक स्थिति है। उन्होंने कहा कि परिग्रह और मोह दुखों की जड़ हैं। इनसे मुक्त होकर आकिंचन धर्म अपनाने से मन को शांति और समता प्राप्त होती है।
इसके बाद वीरांगना मंडल की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें ‘धर्म बोलो’ प्रतियोगिता हुई। संचालन नीरज जैन ने किया। प्रतियोगिता में सार्थक जैन, ईशान जैन, सम्यक जैन, राखी जैन, प्रशांत, मोना, अनंत जैन, मान्या, लकी जैन, निमृत जैन, नेहा जैन, नैंसी जैन, आरती जैन, नीरज जैन, दिव्या जैन और मयंक जैन समेत अन्य ने पुरस्कार जीते। इस मौके पर टीटू जैन, अनिल कुमार जैन सोनी, अजीत जैन, भूपेंद्र जैन, आशीष जैन, राहुल जैन, बबिता जैन, स्वीटी जैन, रीना जैन, ज्योति जैन, शालिनी जैन, ममता जैन और इंदु जैन आदि मौजूद रहे।
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