BiNi ShaKha
“सुंदर हो तुम”
चंद अल्फ़ाज़ भर देते हैं उमंगों से,
मगर तब जब कहे गए हो !
शालीनता से, प्रेम से,अपनत्व से,
न उनमें वासना हो, न कोई अभिप्रयोजन,
न कोई गलत मंशा हो, न मखौल,
बस एक तारीफ हो,
जो भर दे नई ऊर्जा से,
नई ताजगी से, आत्मविश्वास से !
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