
बीडीएन इंडिया नेटवर्क उझानी (बदायूं)24 सितंबर।
दशलक्षण महापर्व के नौवें दिन बृहस्पतिवार को जैन मंदिर में उत्तम आकिंचन धर्म की भक्तिभाव से पूजा-अर्चना की गई। आचार्य श्री वसुनंदी जी महाराज के प्रवचनों के साथ धर्मलाभ लिया गया।
आचार्य श्री ने कहा कि धन, वस्तु और सुख-सुविधाएं कभी भी शाश्वत नहीं रहतीं। इनके प्रति ‘यह मेरा है’ का भाव छोड़ना ही उत्तम आकिंचन है। जरूरत से अधिक संग्रह न कर, जितना आवश्यक हो उतना ही रखने से आकिंचन धर्म का पालन होता है। जब मन से मोह और आसक्ति घटती है, तभी उत्तम आकिंचन स्वयं परिपूर्ण हो जाता है।
इस अवसर पर भगवान श्री चंद्रप्रभु की शांतिधारा का परम सौभाग्य अनूप जैन एवं सम्यक जैन पुत्र विनीत जैन को प्राप्त हुआ। अतिथि पुजारियों द्वारा उत्तम आकिंचन धर्म की पूजन क्रिया और शांति विधान संपन्न कराया गया।
कार्यक्रम में अनूप जैन, अरुण जैन, निखिल जैन, अंकित जैन, सिद्धार्थ जैन, प्रदीप जैन, अजय जैन, मनोज जैन, कुलदीप जैन, अंशुल, संचित जैन, सोनू जैन, अर्जित जैन, शुभ, सक्षम, आकाश, सम्यक सहित सकल जैन समाज मौजूद रहा।
महिला मंडल से श्रीमती संगीता जैन, प्रतिभा जैन, रूपा जैन, रजनी जैन, नीरज जैन, रुचि जैन, कामिनी जैन, ममता जैन, तृप्ति, प्रतिज्ञा, साक्षी, प्राची, सान्वी, पूजा, बीनू, भावना, अनामिका सहित समस्त महिला मंडल की उपस्थिति रही।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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