1:17 pm Wednesday , 23 September 2026
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त्याग ही धर्म है, अहंकार का अंत : उझानी में उत्तम त्याग पर्व पर उमड़ा जैन समाज।

त्याग ही धर्म है, अहंकार का अंत : उझानी में उत्तम त्याग पर्व पर उमड़ा जैन समाज।

उझानी-बदांयू 23 सितंबर।

जहां त्याग है, वहां अहंकार टिक ही नहीं सकता… इसी संदेश के साथ उझानी के साहूकारा स्थित श्री दिगम्बर जैन मंदिर में दसलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म का पर्व बड़े ही भक्ति भाव और धूमधाम से मनाया गया।

सुबह प्रभु अभिषेक और पूजन के बाद आचार्य श्री के संदेश का वाचन हुआ। जिसमें कहा गया – _त्याग का अर्थ सिर्फ वस्तुओं को छोड़ना नहीं, बल्कि अपने भीतर के क्रोध, लोभ और अहंकार को त्याग कर विनम्रता और दान को धारण करना ही सच्चा त्याग है।

आज के पावन दिन भगवान श्री चंद्रप्रभु की शांति धारा करने का परम सौभाग्य निखिल जैन एवं अंशुल जैन को प्राप्त हुआ। अतिथि विद्वान पुजारियों ने मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया, जिससे पूरा मंदिर परिसर जयकारों से गूंज उठा।

इस अवसर पर जैन समाज के वरिष्ठजन अनूप जैन, अरुण जैन, प्रदीप जैन, अजय जैन, मनोज जैन, कुलदीप जैन, अंकित जैन, संचित जैन, शशांक जैन, सोनू जैन, अर्जित जैन सहित बड़ी संख्या में युवा वर्ग मौजूद रहा।

महिला मंडल की ओर से श्रीमती संगीता जैन, प्रतिभा जैन, रूपा जैन, रुचि जैन, कामिनी जैन, ममता जैन, तृप्ति, साक्षी, सान्वी, पूजा, बीनू, भावना, अनामिका आदि ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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