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बदायूं में पुलिस की साख पर दाग: सिपाही-दरोगा सस्पेंड, थानेदारों की कुर्सी पर जांच का साया।

बदायूं

बदायूं में पुलिस की साख पर दाग: सिपाही-दरोगा सस्पेंड, थानेदारों की कुर्सी पर जांच का साया।

15 दिन में बदांयू के दो थानों में मचा बवाल।

बदांयू,23 सितंबर।

बदायूं पुलिस के लिए पिछले 15 दिन भारी पड़े हैं। जरीफनगर और इस्लामनगर थाने से दो ऐसे मामले सामने आए हैं, जिन्होंने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है। एक तरफ अवैध दबिश और परिवार से अभद्रता का आरोप है तो दूसरी तरफ अफीम के साथ पकड़े गए तस्करों को रकम लेकर छोड़ने का गंभीर आरोप।

कार्रवाई के नाम पर अभी तक सिर्फ सिपाही और दरोगा ही नपे हैं, जबकि थाना प्रभारियों की जिम्मेदारी पर अभी भी जांच रिपोर्ट का पर्दा पड़ा है।

7 सितंबर की रात का मामला है। बस्तोई सीकरी चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज टीम के साथ दियोहरा शेखपुर गांव पहुंच गए, जबकि यह गांव उनकी चौकी क्षेत्र में आता ही नहीं है। एनडीपीएस के वांछित के घर दबिश के नाम पर परिवार से अभद्रता, मारपीट और तीन लोगों को अवैध हिरासत में रखने का आरोप लगा।

पीड़ित परिवार ने एसएसपी अंकिता शर्मा से शिकायत की। एसएसपी ने तत्काल एक्शन लेते हुए चौकी प्रभारी मनीष भारद्वाज समेत 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया। बाद में एक और सिपाही रॉबिन शर्मा को लाइन हाजिर किया गया। इस पूरे मामले में थाना प्रभारी बाबूराम गौतम की भूमिका भी सवालों में है, उनसे स्पष्टीकरण लिया गया है। जांच एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह कर रहे हैं, रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी जानी है।

इस्लामनगर का मामला और भी संगीन है। आरोप है कि पुलिस ने तीन लोगों को अफीम के साथ रंगे हाथ पकड़ा। फिर मोटी रकम लेकर चुपचाप उन्हें छोड़ दिया। मामला खुला तो चार सिपाहियों पर गाज गिरी। लेकिन थाना प्रभारी धनंजय सिंह पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं, उनकी भूमिका की जांच चल रही है।

इन दोनों मामलों ने बदायूं पुलिस की निगरानी व्यवस्था पर सीधा सवाल खड़ा कर दिया है।
अगर सिपाही दूसरे चौकी क्षेत्र में जाकर मनमानी कर रहे हैं, तो थाना प्रभारी क्या कर रहा था?
अगर थाने में अफीम के साथ पकड़े गए लोग छोड़े जा रहे हैं, तो क्या थानेदार को इसकी भनक तक नहीं लगी?

एसपी सिटी अभिषेक कुमार सिंह का कहना है कि दोनों मामलों की जांच जारी है, जो भी दोषी मिलेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

अब देखना यह है कि कार्रवाई सिर्फ सिपाही-दरोगा तक ही सीमित रहती है या थाने की कमान संभालने वालों की भी जिम्मेदारी तय होती है।

रिपोर्ट – केशव गुप्ता

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