बदायूं
RAC वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी, अब खाली बर्थ के लिए TTE को नहीं ढूंढना पड़ेगा, मोबाइल पर आएगा मैसेज।
बरेली 21 सितंबर ।
ट्रेन में RAC और वेटिंग टिकट पर सफर करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे एक बड़ी सौगात लाने जा रहा है। जल्द ही खाली बर्थ के लिए न तो टीटीई को तलाशना पड़ेगा और न ही सीट मिलने की उम्मीद में बार-बार पूछताछ करनी होगी।
रेलवे की नई डिजिटल व्यवस्था के तहत ट्रेन में जैसे ही कोई बर्थ खाली होगी, सिस्टम खुद नियम के अनुसार RAC और वेटिंग लिस्ट के अगले पात्र यात्री को स्वतः बर्थ आवंटित कर देगा। सीट आवंटित होते ही यात्री के मोबाइल पर इसकी सूचना पहुंच जाएगी।
नई व्यवस्था में खाली बर्थ की जानकारी कागज और मैनुअल प्रक्रिया में अटकने के बजाय सीधे रेलवे के केंद्रीय कंप्यूटर सिस्टम CRIS तक पहुंचेगी। यात्री रेल मदद या IRCTC के माध्यम से सफर के दौरान ही देख सकेंगे कि किस स्टेशन पर किस कोच में कितनी बर्थ खाली हुई हैं। इससे भागदौड़ और भ्रम कम होगा।
प्रस्तावित व्यवस्था में टीटीई के हैंडहेल्ड टर्मिनल (HHT) को रियल-टाइम डेटा सिस्टम से जोड़ा जा रहा है। रास्ते के किसी स्टेशन पर यदि बुक टिकट वाला यात्री ट्रेन में नहीं चढ़ता है तो टीटीई उस सीट को HHT में ‘अनबोर्ड’ मार्क करेगा। सूचना तत्काल केंद्रीय सिस्टम तक पहुंचेगी और नियमानुसार RAC-वेटिंग में अगले यात्री को बर्थ मिल जाएगी।
यानी सीट की चाबी टीटीई के हाथ में रहेगी, लेकिन किसे बर्थ मिलेगी, इसका फैसला सिस्टम करेगा। यही बदलाव रेलवे की नई डिजिटल व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा बताया जा रहा है।
टिकट जांच करने वाले टीटीई को नई व्यवस्था में हाईटेक बनाया जा रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत टीटीई के HHT को रियल-टाइम बायोमेट्रिक सिंक और GPS ट्रैकिंग से जोड़ा जाएगा।
उपकरणों में 4G कनेक्टिविटी, 5 मीटर तक GPS लोकेशन ट्रैकिंग, डिजिटल उपस्थिति के लिए बायोमेट्रिक फिंगरप्रिंट स्कैनर, 12 घंटे तक बैटरी बैकअप और वाटरप्रूफ-डस्टप्रूफ डिजाइन जैसी सुविधाएं होंगी।
इतना ही नहीं, यात्रियों की शिकायत के लिए भी डिजिटल रास्ता मिलेगा। रेलवे की योजना सिर्फ सीट आवंटन तक सीमित नहीं है। पहले चरण में टीटीई को GPS ट्रैकर, HD बॉडी कैमरा और स्मार्ट जैकेट देने की तैयारी है। किसी यात्री की तबीयत बिगड़ने या सुरक्षा संबंधी आपात स्थिति आने पर टीटीई SOS बटन दबाकर नजदीकी कंट्रोल रूम और अगले स्टेशन मास्टर तक अलर्ट भेज सकेगा।
योजना के अनुसार पहले चरण में दिसंबर 2026 तक मुंबई सेंट्रल डिवीजन की चुनिंदा ट्रेनों में स्मार्ट जैकेट और नए सिस्टम का ट्रायल किया जाएगा। ट्रायल के परिणाम के आधार पर अप्रैल 2027 से इसे देश के सभी 17 रेलवे जोनों में चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना है।
रेलवे का अनुमान है कि व्यवस्था लागू होने के बाद टिकट जांच की दक्षता में 40 प्रतिशत तक वृद्धि और खाली बर्थ के दुरुपयोग में 80 प्रतिशत तक कमी आएगी।
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