मुझे भेड़चाल का रिवाज़ अच्छा नहीं लगता,
जिधर जाए भीड़, उधर जाना अच्छा नहीं लगता।
सफ़र लंबा है तो लंबा ही सही,
मगर किसी के पीछे चलना अच्छा नहीं लगता।
अपनी उड़ान है, अपना आसमान है,
किसी के पर कतरकर बढ़ना अच्छा नहीं लगता।
अँधेरा कितना भी हो, अपनी मशाल काफी है,
किसी से उधार का उजाला लेना अच्छा नहीं लगता।
जो मिलेगा, अपनी मेहनत से मिलेगा,
खैरात में मिला ताज भी मुझे अच्छा नहीं लगता।
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