Jaya
Jaya__Kishori__
इस चित्र में भगवान गणेश का देवी रिद्धि और सिद्धि के साथ विवाह का पौराणिक दृश्य दर्शाया गया है। इस पावन प्रसंग से जुड़ी पौराणिक कथा नीचे दी गई है: विवाह की पौराणिक कथाशास्त्रों और गणेश पुराण के अनुसार, भगवान गणेश के गजानन (हाथी का मुख) और लंबोदर रूप के कारण कोई भी कन्या उनसे विवाह करने के लिए तैयार नहीं हो रही थी। इस बात से दुखी और रुष्ट होकर गणेश जी ने अन्य देवताओं के विवाह कार्यों में विघ्न डालना शुरू कर दिया। वे अपने वाहन मूषक (चूहों) की सेना को भेजकर देवताओं की शादियों के मंडप और रास्ते खुदवा देते थे, जिससे सभी देवी-देवता अत्यंत परेशान हो गए। परेशान होकर सभी देवता भगवान ब्रह्मा के पास सहायता मांगने पहुंचे। देवताओं की समस्या का समाधान निकालने के लिए ब्रह्मा जी ने अपने योग बल से दो अत्यंत सुंदर कन्याओं को प्रकट किया, जिनका नाम रिद्धि (जो धन और समृद्धि की प्रतीक हैं) और सिद्धि (जो बुद्धि और आध्यात्मिक शक्ति की प्रतीक हैं) रखा। ब्रह्मा जी ने दोनों पुत्रियों को गणेश जी के पास शिक्षा ग्रहण करने के लिए भेजा। उन्हें यह निर्देश भी दिया गया कि जब भी किसी देवता के विवाह की सूचना मिले, वे दोनों गणेश जी का ध्यान भटकाकर उन्हें व्यस्त रखें ताकि बाकी देवताओं के विवाह निर्विघ्न संपन्न हो सकें। कुछ समय बाद जब गणेश जी को इस योजना का पता चला, तो वे क्रोधित हो गए। तब ब्रह्मा जी ने उनके सामने रिद्धि और सिद्धि से विवाह का प्रस्ताव रखा, जिसे भगवान गणेश ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। इस प्रकार भगवान गणेश का विवाह रिद्धि और सिद्धि के साथ अत्यंत धूमधाम से संपन्न हुआ। बाद में उन्हें दो पुत्र प्राप्त हुए, जिनका नाम शुभ और लाभ रखा गया। चित्र की मुख्य विशेषताएं:केंद्र में: भगवान गणेश विवाह के पीले वस्त्र पहने हुए और हाथों में त्रिशूल व फरसा धारण किए खड़े हैं। बाईं ओर: देवी रिद्धि और देवी सिद्धि पारंपरिक वधू के वेश में वरमाला लेकर खड़ी हैं। हवन कुंड: सामने एक यज्ञवेदी (हवन कुंड) जल रही है, जहां पुरोहित मंत्रोच्चार के साथ आहुति दे रहे हैं। पृष्ठभूमि में: भगवान शिव, माता पार्वती, ब्रह्मा जी और अन्य देवी-देवता इस भव्य विवाह समारोह के साक्षी बन रहे हैं और आशीर्वाद दे रहे हैं
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