NEHA MEHTA
शुभ प्रभात सादर नमस्कार
“तेरे न होने का मुझको मलाल एक तरफ,
तू मेरा क्यों न हुआ, ये सवाल एक तरफ।
यकीन मान, मैं खुश हूँ मगर,
जब तू संग था — वो पल, वो दिन, वो महीने,
वो साल एक तरफ।
जहाँ भर के हैं मंज़र मेरी नजर में मगर
उस एक शख्स का दिल में ख्याल एक तरफ।
हजार शिकवे – शिकायत मुझे हैं तुझसे
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