NEHA MEHTA
ये तेरा लहजा जो मीठा हो रहा है
अब मुझे तुझ से भी खतरा हो रहा है
पास मेरे कोई कश्ती भी नहीं
और पानी धीरे धीरे गहरा हो रहा है
इसलिए भी चुप थे हम दोनों शब ए वस्ल
जानते थे हम कि धोका हो रहा है
सोचा था मैंने है औरों से अलग तू
जो भी सोचा था सब उल्टा हो रहा है
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