Gunjan Agrawal
कुछ “दर्द” खामोशी से लबरेज़ होते हैं..!!
वे शोर नहीं करते,
बस इंसान के भीतर…
एक सन्नाटा छोड़ जाते हैं.!!
फिर न तो कोई शिकायत रहती है,
न ही बचते हैं कोई भी सवाल…
बस सब कुछ पहले जैसा,
महसूस होना बंद हो जाता है..!!!!
गुंजन शिशिर
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