1:46 am Wednesday , 12 August 2026
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प्रेम प्रतीक्षा- Bhadana

“प्रेम प्रतीक्षा”

​घड़ी की सुइयाँ थम सी गई हैं,
राहें भी अब नम सी गई हैं।
पलकों पर सजा है एक इंतज़ार,
जैसे पतझड़ माँगे फिर से बहार।
​न कोई आहट, न कोई संदेशा,
मन में बस मिलने का अंदेशा।
समय का पहिया धीरे चलता है,
प्रेम प्रतीक्षा में ही तो पलता है।

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