1:44 am Friday , 2 October 2026
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मानवता का आदर्श है शहादत इमाम हुसैन , सत्य पर बलिदान की एक मिसाल है माहे मुहर्रम

वजीरगंज (बदायूँ ) | माहे मुहर्रम के मुबारक मौके पर हज़रत इमाम हुसैन की याद में घर घर में लंगर फातिहा ख्वानी कुरान ख्वानी हुई | सुबह से ही मुस्लिम समुदाय के लोगों ने अपने अपने घरों पर कुरान की तिलावत और नात्ख्वानी की | मस्जिदों में नमाज़ के बाद हज़रत इमाम हुसैन कि शान में तकरीरे हुई और नगर के प्रमुख प्रमुख मुहल्लों में दस दिन लगातार जलसे का आयोजन किया गया । हज़रत इमाम हुसैन की याद में लोगों ने एफएम हाईवे पर राहगीरों के लिए हलवा फल चाय शरबत समोसा आइसक्रीम लंगर के स्टाल लगा कर अपनी अकीदत का इज़हार किया | इधर क़स्बा सैदपुर में भी मुहर्रम के मौके पर लोगों ने अपने अपने घरों के सामने उनकी याद में सबीलें लगवाईं व ताजिये बनाये । देर शाम तक लोग इस पाक माह की निस्बत से इबादत में मसरूफ़ रहे । कसबे में थरमाकॉल से इंग्लैण्ड की शाहजहां मस्जिद इग्लैण्ड, इस्लामिक सेंन्टर अमेरिका, मस्जिद अफगनिस्तान, रोजा इमाम हुसैन, रोज़ा गौसे पाक आदि का नक्शा तय्यार किया गया ।

मुहर्रम की दस तारीख का इतिहास

वजीरगंज | मोहर्रम हिजरी कैलेंडर का पहला महीना है और इसी महीने से नया हिजरी साल शुरू होता है। मोहर्रम की दस तारीख को यौमे आशूरा कहा जाता है और मोहर्रम की दस तारीख से इस्लामी इतिहास की बहुत सी महत्वपूर्ण घटनाएं जुड़ी हैं । इसीलिए इस महीने का मुसलमान बहुत आदर करते हैं। इस महीने की दस तारीख अर्थात यौमे आशूरा को हज़रत आदम अलैहिस्सलाम की तौबा कुबूल हुई इसी दिन नूह अलैहिस्सलाम की कश्ती तूफान से निकली थी इसी दिन हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम को फिरऔन के जुल्म से निजात मिली थी । मुहर्रम की दस तारीख को ही हज़रत अय्यूब अलैहिस्सलाम को लंबी बीमारी से निजात मिली थी | दस मोहर्रम को ही हज़रत यूनुस अलैहिस्सलाम मछली के पेट से बाहर निकले थे और दस मुहर्रम को ही हज़रत इमाम हुसैन ने सच्चाई कि विजय के लिए अपनी शहादत दी थी | मोहर्रम की दस तारीख को अधिकतर मुसलमान रोजा भी रखते हैं ।

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