उझानी में सट्टा कारोबार पर पुलिस की कार्रवाई बेअसर, सरगना तक नहीं पहुंच पा रही खाकी।
उझानी-बदांयू 12 जून।
नगर में सट्टे के अवैध कारोबार पर पुलिस की कार्रवाई महज खानापूर्ति बनकर रह गई है। पुलिस छोटी-छोटी मछलियों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, लेकिन सट्टे के असली सरगना आज भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
ताजा मामला थाना उझानी क्षेत्र का है। 11 जून को उप निरीक्षक किशनवीर सिंह ने मय हमराह कांस्टेबल नरेश कुमार व सचिन शर्मा के साथ बुटला दौलत रोड पर छापा मारा। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने सरकारी ट्यूबवेल से 100 मीटर आगे नत्थू पुत्र श्रीपाल, निवासी ग्राम बुटला दौलत को सट्टे की खाईबाड़ी करते रंगे हाथ पकड़ा।
पकड़ा गया आरोपी जोर-जोर से “आओ-आओ, एक लगाओ 90 पाओ” की आवाज लगा रहा था। मौके से पुलिस ने 1 सट्टा डायरी, 1 डॉट पेन, पर्ची व 560 रुपये नकद बरामद किए। डायरी में सट्टे के नंबर लिखे मिले। आरोपी के खिलाफ धारा 13G सट्टा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तार किया गया।
कोतवाली पुलिस के आंकड़े बताते हैं कि एक महीने में 5-6 सटोरिए जरूर पकड़े गए हैं, लेकिन ये सभी छोटे मोहरे हैं। पकड़े गए आरोपी दूसरे दिन जमानत पर छूटकर फिर उसी धंधे में लग जाते हैं। सवाल यह है कि आखिर पुलिस सट्टे के नेटवर्क चलाने वाले बड़े सरगना तक क्यों नहीं पहुंच पा रही?
स्थानीय लोगों का कहना है कि हर गली-मोहल्ले में सट्टे की पर्चियां कट रही हैं, लेकिन पुलिस सिर्फ दिखावे की कार्रवाई कर रही है। जब तक पुलिस सट्टे की जड़ तक नहीं पहुंचेगी, तब तक यह गोरखधंधा यूं ही फलता-फूलता रहेगा।
राजेश वार्ष्णेय एमके।

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