दशहरा के साथ सूर्य देव करेंगे रोहिणी में प्रवेश प्रारंभ होगा नौतपा: आचार्य राजेश कुमार शर्मा
इस साल नौतपा 25 मई से शुरू होकर 2 जून तक रहेगा। लगभग 9 दिनों तक चलने वाली इस अवधि में भीषण गर्मी पड़ने की संभावनाएं हैं। वहीं ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति बता रही है कि इस दौरान कई स्थानों पर तेज गर्म हवाएं और असहनीय तापमान देखने को मिल सकता है। आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं 25 मई से 2 जून तक नौतपा का प्रभाव रहने वाला है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह अवधि वर्ष के सबसे अधिक गर्म और प्रभावशाली दिनों में गिनी जाती हैं। मान्यता है कि, जब सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब नौतपा की शुरुआत होती हैं। इस दौरान सूर्य का तेज और अग्नि तत्व अत्यधिक सक्रिय हो जाता है, जिसका सीधा असर पृथ्वी और मौसम पर देखने को मिलता है। कहा जाता है कि, नौतपा के दिनों में सूर्य की किरणें अधिक प्रखर होकर धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही वजह है कि इस समय भीषण गर्मी और तेज लू का सामना करना पड़ता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि, नौतपा के दिनों में किन कार्यों को करना चाहिए।
नौतपा ज्योतिष कारण
आचार्य राजेश कुमार शर्मा बताते हैं ज्योतिषियों के अनुसार, जब सूर्य देव वृषभ राशि में स्थित होकर रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते हैं, तब धरती पर अग्नि तत्व का प्रभाव बढ़ने लगता है। दरअसल, रोहिणी नक्षत्र का स्वामी चन्द्रमा है, जो शीतलता के कारक है। जबकि सूर्य अग्नि के कारक ग्रह माने जाते हैं। ऐसे में अग्नि और ताप का यह संयोग वातावरण में तीव्र गर्मी पैदा करता है। इसका खास असर देश-दुनिया पर नजर आता है। मान्यता है कि, नौतपा के दौरान सूर्य की किरणें अधिक तीक्ष्ण हो जाती हैं और उनका प्रभाव सीधे पृथ्वी पर पड़ता है। यही कारण है कि इन दिनों तापमान अचानक बढ़ने लगता है, लू चलती है और प्रकृति तपने लगती है।
नौतपा और सूर्य देव की उपासना
ज्योतिषियों के अनुसार, नौतपा के दौरान प्रतिदिन तांबे के लोटे से सूर्य को जल अर्पित करें। इस दौरान जल में लाल फूल, रोली या अक्षत डालकर अर्घ्य देने से सूर्य की कृपा प्राप्त होती हैं। साथ ही ॐ घृणि सूर्याय नमः मंत्र का जाप करने से आत्मबल और ऊर्जा में वृद्धि होती है।
गंगा दशहरा
हिंदू धर्म में गंगा दशहरा को एक अत्यंत पवित्र और श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व माना जाता है। यह दिन मां गंगा के धरती पर अवतरण का प्रतीक है, जिसे आध्यात्मिक शुद्धि और पापों से मुक्ति का अवसर माना जाता है। हर वर्ष ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और दान-पुण्य करने से व्यक्ति को अनेक प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में पुण्य फल की प्राप्ति होती है। आइए जानते आचार्य राजेश कुमार शर्मा से गंगा दशहरा की तिथि और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त।
गंगा दशहरा तिथि
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि आरंभ: 25 मई, प्रातः 4:30 मिनट पर
ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि समाप्त: 26 मई, प्रातः 05:10 मिनट पर
उदयातिथि के अनुसार गंगा दशहरा 25 मई 2026 को मनाया जाएगा।
गंगा दशहरा स्नान-दान मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: 25 मई, प्रातः 4:30 मिनट से 05:30 मिनट तक
अमृत चौघड़िया: प्रातः 05:25 मिनट से प्रातः 07: 08 मिनट तक
शुभ चौघड़िया: प्रातः 08″51 मिनट से 10:34 मिनट तक
गंगा दशहरा का महत्व
गंगा दशहरा के दिन स्नान को अत्यंत पवित्र और फलदायी माना गया है। इस अवसर पर दशविध स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के सभी प्रकार के पापों का नाश हो जाता है। इसमें शरीर से किए गए तीन प्रकार के पाप, वाणी से जुड़े चार प्रकार के पाप और मन से किए गए तीन प्रकार के पाप शामिल माने जाते हैं। इस तरह गंगा दशहरा का स्नान आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण माध्यम माना गया है।
आचार्य राजेश कुमार शर्मा
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