Ravina Mishra
जले तैलं खले गुह्यम् पात्रे दानं मनागपि।
प्राज्ञे शास्त्रं स्वयं यति विस्तार वस्तुशक्तित:।
पानी में गिरा तेल, दुष्ट से कही गुप्त बात, सुपात्र को दिया दान और बुद्धिमान मनुष्य का शास्त्राभ्यास अपनी हीं शक्ति से विस्तार पाता है।
शुभ प्रभात बंधुओं।
जय बजरंग बली।
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